उत्तर प्रदेश के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए विशटाउन के निदेशक और बिल्डर अभय कुमार को बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बिल्डर को अवैध हिरासत से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की डबल बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया है.
गिरफ्तारी को बताया अवैध, पुलिस की प्रक्रिया में मिली खामी
बिल्डर अभय कुमार ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाई कोर्ट में ‘हैबियास कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) रिट याचिका दायर की थी. याचिका में उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को अवैध, शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान अभय कुमार के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो के ‘क्लॉज 13’ का पालन नहीं किया और न ही याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से पहले कोई जानकारी दी गई. कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए माना कि पुलिस ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की है.
रिहाई के लिए कॉपी का इंतजार न करें अफसर
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद संबंधित अथॉरिटी को सख्त निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अभय कुमार को तुरंत रिहा किया जाए. कोर्ट ने एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट (AGA) को आदेश दिया कि वे इस फैसले की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सर्टिफाइड कॉपी का इंतजार न किया जाए और आदेश का पालन तत्काल प्रभाव से हो.
16 जनवरी को गड्ढे में गिरने से गई थी जान
यह पूरा मामला 16 जनवरी की रात का है, जब नोएडा के सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट पर बड़ा हादसा हुआ था. यहां खुले पड़े गड्ढे में गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस घटना के बाद लोगों में भारी गुस्सा था और नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ बिल्डर पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया था, जिसे अब हाई कोर्ट ने गलत ठहराया है.














