उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (SP) पर चुटकी लेते हुए एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर पूरा सदन हैरान रह गया. राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी ने सपा सरकार के समय की शिक्षा व्यवस्था और मंत्रियों की जानकारी पर सवाल उठाए. उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सपा के एक तत्कालीन शिक्षा मंत्री महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां में फर्क नहीं कर पाए थे.
‘बिस्मिल्लाह खां को फांसी कैसे हो सकती है?’
सीएम योगी ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक बार गोरखपुर में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के ‘बलिदान दिवस’ पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. वहां सपा सरकार के एक शिक्षा मंत्री को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया.
- अज्ञानता की हद: सीएम ने बताया, “जब मंत्री जी को बताया गया कि आज बिस्मिल जी का शहादत दिवस है और उन्हें फांसी दी गई थी, तो मंत्री भ्रमित हो गए. उन्होंने कहा- ‘अरे, बिस्मिल्लाह खां को तो अभी हाल ही में पुरस्कार मिला है, उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है?’“
- बीजेपी का एजेंट बताया: योगी ने आगे बताया कि जब वहां मौजूद लोगों ने मंत्री को समझाने की कोशिश की कि बात क्रांतिकारी ‘बिस्मिल’ की हो रही है, शहनाई वादक ‘बिस्मिल्लाह खां’ की नहीं, तो मंत्री ने उल्टा उस व्यक्ति पर ही ‘बीजेपी का एजेंट’ होने का आरोप लगा दिया.
‘6 महीने से दफ्तर नहीं गए मंत्री, अधिकारी पहचान नहीं पाए’
योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार की कार्यशैली पर एक और किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि जब वे गोरखपुर से सांसद थे, तब एक रेलवे स्टेशन पर कुछ अधिकारी खड़े थे. उसी समय सपा के माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे, लेकिन किसी अधिकारी ने उन्हें नमस्ते तक नहीं किया.
- पहचान का संकट: सीएम ने कहा, “जब मैंने अधिकारियों से पूछा कि आप मंत्री जी को नहीं पहचानते? तो अधिकारी ने जवाब दिया- ‘कौन से मंत्री? साहब, ये 6 महीने से दफ्तर ही नहीं आए, तो हम इन्हें कैसे पहचानेंगे?’“
सीएम बोले- ‘मेरे पास प्रमाण है’
विपक्ष द्वारा टोका-टाकी करने पर सीएम योगी ने साफ कहा कि ये घटनाएं मनगढ़ंत नहीं हैं, बल्कि हकीकत हैं और उनके पास इसके प्रमाण मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि जब शिक्षा व्यवस्था चलाने वालों का यह हाल था, तो प्रदेश की शिक्षा का बेड़ा गर्क होना तय था.














