लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब विधानसभा चुनाव प्रचार का शंखनाद कर दिया है। शनिवार को पंजाब के बरनाला में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बहुचर्चित ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ (India-US Trade Deal) को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल ने इसे देश के किसानों, मजदूरों और छोटे उद्योगों की बर्बादी का ‘डेथ वारंट’ करार दिया है।
‘ट्रंप के दबाव में रातों-रात क्यों हुआ समझौता?’
राहुल गांधी ने इस ट्रेड डील की टाइमिंग और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
- “जो व्यापार समझौता काफी समय से अटका हुआ था, अचानक पीएम मोदी उसके लिए कैसे सहमत हो गए? सच यह है कि यह डील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी दबाव में की गई है।”
- उन्होंने दावा किया कि खुद ट्रंप ने बताया है कि पीएम मोदी ने उन्हें फोन करके इस डील के लिए सहमति दी थी।
- राहुल ने कहा कि पीएम कृषि क्षेत्र को इस डील से बाहर रखना चाहते थे, लेकिन अमेरिकी दबाव के आगे वह झुक गए और सिर झुकाकर इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।
राहुल गांधी के 3 सबसे बड़े और गंभीर आरोप:
- छोटे उद्योग और किसान होंगे तबाह: राहुल ने दावा किया कि इस डील में पीएम मोदी ने ट्रंप को गारंटी दी है कि भारत हर साल अमेरिका से 9 लाख करोड़ रुपये के उत्पाद खरीदेगा। इससे भारतीय बाजार अमेरिकी सामानों से पट जाएगा और हमारे छोटे उद्योग (MSMEs) और किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
- ऊर्जा सुरक्षा खतरे में: राहुल ने आरोप लगाया कि इस डील की एक शर्त यह भी है कि भारत अब उसी देश से तेल खरीदेगा, जिससे अमेरिका चाहेगा। इससे भारत की स्वतंत्र ऊर्जा नीति और सुरक्षा सीधे खतरे में पड़ गई है।
- डेटा ट्रांसफर का खेल: ’21वीं सदी डेटा की सदी है’ का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि दबाव में आकर मोदी सरकार ने भारत की जनता का बेशकीमती डेटा भी अमेरिका को सौंपने का रास्ता साफ कर दिया है।
पंजाब के किसानों को दिलाई ‘कृषि कानूनों’ की याद
पंजाब के किसानों की नब्ज टटोलते हुए राहुल गांधी ने उन्हें मनरेगा की बर्बादी और पिछले ‘तीन कृषि कानूनों’ की याद दिलाई। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि किसान देश की नींव हैं, और उन्हें याद रखना चाहिए कि यही सरकार पहले भी उन पर काले कानून थोप चुकी है।














