उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की सांसद Iqra Hasan को मंगलवार को पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब सांसद एक पीड़ित महिला के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचीं थीं।
बताया जा रहा है कि महिला थाना पुलिस ने इकरा हसन को उस दौरान हिरासत में लिया, जब वह एक महिला की शिकायत को लेकर अधिकारियों से मिलने गई थीं। इस दौरान डीआईजी कार्यालय की पार्किंग में वाहन खड़ा करने को लेकर विवाद बढ़ गया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पीड़ित महिला के समर्थन में पहुंचीं थीं इकरा हसन
जानकारी के अनुसार, सपा सांसद एक ऐसी महिला के साथ डीआईजी दफ्तर पहुंचीं थीं, जिसका आरोप है कि उसके बेटे की बेरहमी से हत्या की गई। इकरा हसन का कहना है कि पीड़ित महिला के साथ अधिकारियों ने गलत व्यवहार किया और उसकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई।
घटना के समय महिला थाना प्रभारी समेत कई महिला पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थीं। कुछ देर की कार्रवाई के बाद पुलिस ने सांसद को रिहा कर दिया।
इकरा हसन ने पुलिस पर लगाया दबाव बनाने का आरोप
मीडिया से बातचीत करते हुए इकरा हसन ने कहा, “ये हमें तमाशा बनाने के लिए लाए थे. ड्रामा करने और दबाव बनाने के लिए लाए थे. एक महिला जिसका बेटा मर गया, वो रोती हुई डीआईजी के दफ्तर से निकली. अब हमें तमाशा बनाने के लिए लाए थे।”
उन्होंने आगे कहा, “पुलिसवाले हमें डीआईजी ऑफिस की पार्किंग से गिरफ्तार कर के महिला थाने लाए थे. हम वहां एक पीड़ित मां के साथ गए थे जिसको बेइज्जत कर के वापस भेज दिया था. हम पर आरोप लगाया कि हमने ट्रैफिक रोका, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था. ये केवल ड्रामा करने के लिए किया गया।”
‘अगर महिला की बात सुन ली जाती तो नेता की जरूरत नहीं पड़ती’
सपा सांसद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर अधिकारी लाचार महिला की बात सुन लेते तो क्या दिक्कत थी. अगर उनकी बात सुनी जाती तो उन्हें शायद मेरी या किसी और नेता की जरूरत नहीं थी. वह महिला किसी छोटे केस के लिए नहीं बल्कि उनके बेटे को बेरहमी से मारा गया है।”
इस घटना के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।















