देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने बिजली व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा ले ली है। कई राज्यों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और करोड़ों लोग राहत के लिए एसी, कूलर और पंखों पर निर्भर हैं। ऐसे हालात में मई 2026 में भारत की बिजली मांग ने लगातार रिकॉर्ड तोड़े, लेकिन इसके बावजूद देश बड़े बिजली संकट और ब्लैकआउट से बचा रहा।
21 मई को देश की बिजली मांग 2,70,820 मेगावाट यानी 270.82 गीगावाट के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई। इसके बावजूद ग्रिड स्थिर बना रहा। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी आबादी की बिजली जरूरत कैसे पूरी हो रही है?
बिजली की मांग ने लगातार तोड़े रिकॉर्ड
इस साल गर्मी शुरू होते ही बिजली की खपत में तेज उछाल देखने को मिला। 25 अप्रैल 2026 को देश की बिजली मांग पहली बार 256.1 गीगावाट तक पहुंची थी, जिसने मई 2024 के 250 गीगावाट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
इसके बाद मई के तीसरे सप्ताह में मांग और तेजी से बढ़ी:
- 18 मई: 260.45 गीगावाट
- 19 मई: 263 गीगावाट
- 20 मई: 265.44 गीगावाट
- 21 मई: 270.82 गीगावाट
राजधानी Delhi में भी 21 मई को बिजली मांग 8,231 मेगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक के रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब रही।
रिकॉर्ड मांग पूरी करने के लिए सरकार का ‘थ्री-प्रॉन्ग्ड प्लान’
इतिहास की सबसे ज्यादा बिजली मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने तीन स्तरों पर रणनीति अपनाई।
थर्मल पावर बना सबसे बड़ा सहारा
देश की बिजली जरूरत पूरी करने में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। सरकार ने सभी थर्मल प्लांटों को बिना किसी मेंटेनेंस शटडाउन के पूरी क्षमता से चलाने के निर्देश दिए हैं।
21 मई को पीक डिमांड के दौरान कुल बिजली उत्पादन में थर्मल पावर की हिस्सेदारी करीब 62.8 प्रतिशत रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगातार 60 प्रतिशत से ज्यादा बिजली आपूर्ति थर्मल प्लांटों से हो रही है।
सोलर एनर्जी ने दिन में घटाया दबाव
गर्मी के दौरान दिन के समय बिजली मांग को संभालने में सौर ऊर्जा भी बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
21 मई को कुल बिजली उत्पादन में सोलर एनर्जी का योगदान करीब 22 प्रतिशत रहा। 19 मई को दोपहर के समय अकेले सौर ऊर्जा से लगभग 57 गीगावाट बिजली उत्पादन हुआ।
सरकार ने जलविद्युत उत्पादन को दिन में सीमित रखकर शाम के समय इस्तेमाल की रणनीति भी अपनाई, ताकि सूर्यास्त के बाद ग्रिड पर अचानक दबाव न बढ़े।
रीयल टाइम ग्रिड मैनेजमेंट से टला संकट
बिजली आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के लोड डिस्पैच सेंटरों के बीच लगातार रीयल टाइम समन्वय किया गया।
एडवांस्ड रिसोर्स प्लानिंग और बेहतर शेड्यूलिंग की मदद से बिजली कटौती और बड़े ब्लैकआउट जैसी स्थिति को रोका गया।
क्या सच में सिर्फ 19 दिन का कोयला बचा है?
रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच सबसे बड़ी चिंता कोयले के स्टॉक को लेकर सामने आई है। सरकार ने स्वीकार किया है कि थर्मल पावर प्लांटों के पास फिलहाल करीब 18-19 दिनों की जरूरत के बराबर कोयला मौजूद है, जबकि सामान्य मानक 30 दिन का माना जाता है।
हालांकि केंद्र सरकार ने दावा किया है कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक थर्मल प्लांटों के पास लगभग 5.37 करोड़ टन कोयले का भंडार मौजूद है।
सरकार के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
कुछ राज्यों में स्थानीय स्तर पर बिजली संकट की आशंका भी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Odisha समेत कुछ इलाकों में NTPC के थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी की खबरें आई हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए नई थर्मल पावर क्षमता बढ़ाने की रफ्तार अभी पर्याप्त नहीं है। वित्त वर्ष 2026 में देश अपने लक्ष्य के मुकाबले कम नई थर्मल क्षमता जोड़ पाया।
जून-जुलाई में और बढ़ सकती है बिजली मांग
ऊर्जा मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है कि आने वाले महीनों में बिजली मांग और बढ़ सकती है। अनुमान है कि जून में मांग 271 गीगावाट और जुलाई में 283 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
इसी बीच India Meteorological Department (IMD) ने अगले 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है।
आम लोगों से क्या अपील की गई?
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली का इस्तेमाल समझदारी से करें, खासकर दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच पीक आवर्स में अनावश्यक बिजली खपत से बचें।
फिलहाल थर्मल पावर, सौर ऊर्जा और मजबूत ग्रिड मैनेजमेंट के सहारे देश की बिजली व्यवस्था दबाव झेल रही है, लेकिन आने वाले दिनों में बढ़ती गर्मी इस चुनौती को और कठिन बना सकती है।















