राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए शेल्टर होम बनाने के निर्देश को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। NHAI ने दावा किया है कि देशभर में ऐसे शेल्टर होम बनाने के निर्देश को लागू करने में करीब 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। प्राधिकरण ने इस जिम्मेदारी को स्थानीय स्तर की एजेंसियों को सौंपने की मांग की है।
NHAI ने कहा- शेल्टर बनाना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी हो
सुप्रीम कोर्ट में NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आवारा मवेशियों के लिए देशभर में शेल्टर होम बनाना और उनका संचालन करना NHAI की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। NHAI का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था जिला स्तर के प्रशासन या संबंधित स्थानीय एजेंसियों के माध्यम से की जानी चाहिए।
तुषार मेहता ने अदालत के सामने कहा, “Our case is that it should be done by the local district-level administration. We cannot do it pan India.” NHAI के मुताबिक, पूरे देश में इस तरह की व्यवस्था करना उसके लिए व्यावहारिक नहीं है और शेल्टर से संबंधित जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को दी जानी चाहिए।
7,000 करोड़ रुपये के खर्च का NHAI ने दिया अनुमान
NHAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम स्थापित करने पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसी आर्थिक बोझ और जिम्मेदारी को लेकर प्राधिकरण ने अदालत के समक्ष अपनी आपत्ति रखी है।
NHAI का कहना है कि उसका मुख्य दायित्व राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के विकास, रखरखाव और सड़क सुरक्षा से संबंधित है। वहीं, आवारा पशुओं के लिए स्थायी शेल्टर तैयार करने और उनके संचालन की व्यवस्था स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए।
19 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 के अपने आदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर आवारा मवेशियों तथा अन्य पशुओं की मौजूदगी से जुड़े सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर निर्देश जारी किए थे। अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों को मिलकर काम करने और हाईवे से आवारा मवेशियों व अन्य पशुओं को हटाकर उचित शेल्टर, गौशाला या पशु-पाउंड में पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा था।
अदालत के आदेश में NHAI को संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय करके राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए समयबद्ध व्यवस्था तैयार करने को कहा गया था। इसमें पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए विशेष वाहनों और उपयुक्त holding या shelter facilities की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया था।
NHAI की अर्जी पर बनेगी Special Bench
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NHAI की अर्जी पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने का अनुरोध किया। उन्होंने उस विशेष पीठ का भी उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे थे और जिसमें जस्टिस संदीप मेहता तथा जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल थे।
यह मामला उस समय मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आया, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। तुषार मेहता ने कहा कि विशेष पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश की आवश्यकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विशेष पीठ का गठन किया जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष पीठ गठित किए जाने के बाद NHAI की अर्जी पर आगे सुनवाई होगी। फिलहाल NHAI की ओर से देशभर में शेल्टर होम बनाने की जिम्मेदारी को लेकर आपत्ति और करीब 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च का मुद्दा अदालत के सामने है। वहीं, 19 मई के आदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं को हटाने और उनके लिए उपयुक्त shelter infrastructure की व्यवस्था को लेकर NHAI की भूमिका तय की गई थी।














