हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है, लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को स्पष्ट करते हुए साफ कर दिया है कि वह वही करेगा जो देशहित में होगा। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ समझौतों के बाद अब भारत अपने पुराने दोस्त रूस के साथ एक और बड़ी ‘मेगा डील’ करने जा रहा है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने पुष्टि की है कि भारत के साथ प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) को लेकर बातचीत का पहला दौर सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह समझौता केवल तेल और हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा काफी विस्तृत होने वाला है।
रूसी उप प्रधानमंत्री ने दिए बड़े संकेत
रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, एलेक्सी ओवरचुक ने इस समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा, “हम फिलहाल भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमें इस डील के फाइनल होने की काफी उम्मीद है। यह डील रूसी कंपनियों के लिए काफी अवसर पैदा करेगा। अगर भारत के साथ समझौता हो जाता है तो रूसी व्यवसायों को 2.2 अरब लोगों के बाजार तक पहुंच मिल जाएगी।” इस समझौते के तहत भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मिलकर एक ट्रेड फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जिसका मकसद गुड्स एंड सर्विसेज पर टैक्स कम करना और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।
100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
इस नए समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के व्यापारिक रिश्तों को पारंपरिक क्षेत्रों जैसे एनर्जी और डिफेंस से आगे ले जाना है। अब दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रही उथल-पुथल के बीच भारत और रूस एक सीमित बाजार पर निर्भर रहने के बजाय व्यापार में विविधता लाना चाहते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था।














