तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) को अपने पुराने कानूनी मामलों के चलते हैदराबाद की ‘प्रजा प्रतिनिधि विशेष अदालत’ (नामपल्ली कोर्ट) में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा है। कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट पहुंचे मुख्यमंत्री ने न्यायाधीश के सामने अपनी हाजिरी लगाई। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा छेड़ दी है कि सत्ता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी पुराने केस आसानी से नेताओं का पीछा नहीं छोड़ते।
किन 2 पुराने मामलों में पेश हुए CM रेवंत रेड्डी?
- पहला मामला: 2019 का चुनाव आचार संहिता उल्लंघन– यह मामला 7 साल पुराने 2019 के हुजूरनगर उपचुनाव (Huzurnagar Bypoll) से जुड़ा है। आरोप है कि उस समय रेवंत रेड्डी और तत्कालीन सांसद उत्तम कुमार रेड्डी ने चुनाव आयोग (EC) के नियमों को ताक पर रखते हुए एक उम्मीदवार के समर्थन में 40 कारों का लंबा काफिला और डीजे (DJ) साउंड के साथ विशाल रैली निकाली थी। ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ के सीधे उल्लंघन पर चुनाव आयोग के अधिकारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने यह एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।
- दूसरा मामला: 2021 में तोड़े गए कोविड के सख्त नियम– दूसरा केस साल 2021 का है, जब पूरे देश में कोरोना महामारी (COVID-19) को लेकर सख्त पाबंदियां लागू थीं। आरोप है कि उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए रेवंत रेड्डी ने बिना मास्क लगाए और ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक बड़ी सार्वजनिक बैठक में हिस्सा लिया था।
‘राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज हुए थे केस’
मुख्यमंत्री पक्ष का हमेशा से यह तर्क रहा है कि ये दोनों मामले उस समय दर्ज किए गए थे जब राज्य में केसीआर (KCR) के नेतृत्व वाली बीआरएस (BRS) की सरकार थी, और ये केस पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। फिलहाल अदालत ने दोनों मामलों की आगे की जांच पर गौर करते हुए सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी है।














