उत्तर प्रदेश की राजनीति में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आगामी लखनऊ दौरे को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों का तापमान और बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां शंकराचार्य लगातार राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी तरफ केशव मौर्य का नरम रुख कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है।
शंकराचार्य के स्वागत पर क्या बोले मौर्य?
सोमवार को अपने वाराणसी दौरे के दौरान पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य के लखनऊ आगमन पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा, “जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज यदि लखनऊ आते हैं तो एक राम भक्त होने के नाते उनका स्वागत करेंगे.” यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि डिप्टी सीएम इस पूरे विवाद में टकराव से बचते हुए एक अलग लाइन ले रहे हैं।
गौ माता को ‘राज्य माता’ बनाने पर दो टूक
शंकराचार्य द्वारा गौ रक्षा और गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग पर भी केशव मौर्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में गाय को राज्य माता का दर्जा देने की कोई जरूरत नहीं है। राज्य में गौ-तस्करी पर सरकार की सख्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में यूपी के भीतर किसी भी गौ तस्कर की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह गाय पर हाथ भी डाल सके।
सीएम योगी और केशव मौर्य के रुख में क्या है अंतर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण में केशव प्रसाद मौर्य का झुकाव स्पष्ट रूप से शंकराचार्य के पक्ष में नजर आ रहा है। आपको बता दें कि जनवरी महीने में प्रयागराज के माघ मेले में जब स्नान को लेकर विवाद हुआ था और शंकराचार्य अनशन पर बैठे थे, तब भी मौर्य ने उनसे विनम्रतापूर्वक अनशन खत्म कर स्नान करने की अपील की थी। यह रुख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्टैंड से काफी अलग प्रतीत होता है, क्योंकि शंकराचार्य सीधे तौर पर सीएम योगी को अपने निशाने पर ले रहे हैं। ऐसे में 7 मार्च को शंकराचार्य के लखनऊ कूच से पहले बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है।
अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार
इस विवाद में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा शंकराचार्य का समर्थन करने पर भी डिप्टी सीएम ने करारा पलटवार किया। उन्होंने सपा प्रमुख को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “अखिलेश यादव एक ढोंगी व्यक्ति हैं वह राम भक्तों पर कृष्ण भक्तों पर और शिव भक्तों पर अत्याचार करते हैं, मुस्लिम तुष्टिकरण करते हैं. शंकराचार्य के पक्ष में बोलते हैं तब समझ लीजिए वह हिंदुओं का वोट लेने के लिए ढोंग कर रहे हैं.”














