अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक संकट के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस अहम समुद्री मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ रहा है। इसी बीच ईरान ने साफ संकेत दे दिया है कि फिलहाल राहत मिलने वाली नहीं है।
ईरान का साफ जवाब—कब तक बंद रहेगा होर्मुज?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने स्पष्ट कहा है कि जब तक ईरान की कथित 11 ट्रिलियन डॉलर की जब्त संपत्ति वापस नहीं की जाती, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का फैसला जारी रहेगा। इस बयान ने अमेरिका पर दबाव और बढ़ा दिया है और वार्ता की संभावनाएं भी जटिल हो गई हैं।
ट्रंप का सख्त आदेश, बढ़ी सैन्य हलचल
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्थिति को देखते हुए अमेरिकी नौसेना को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पानी में माइन्स बिछाने वाली किसी भी संदिग्ध नाव को तुरंत नष्ट कर दिया जाए। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समय होर्मुज क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
भारत समेत दुनिया में बढ़ी चिंता
बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने भी मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने या क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। वैश्विक स्तर पर इस संकट का असर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है।
ट्रंप के बयान पर अमेरिका की सफाई
इस बीच सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट को लेकर भी अमेरिका को सफाई देनी पड़ी। एक रीपोस्ट में भारत समेत कुछ देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ था, जिस पर अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ट्रंप भारत को “महान देश” मानते हैं और उसके नेतृत्व को अपना “अच्छा मित्र” बताते हैं।
जहाजों पर कार्रवाई, भारतीय नाविक भी सवार
होर्मुज के पास बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने तीन विदेशी जहाजों पर कार्रवाई की। “फ्रांसेस्का” और “एपामिनोंडास” नाम के जहाजों को कब्जे में लिया गया, जबकि “यूफोरिया” पर गोलीबारी की गई। इन जहाजों में भारतीय नाविक भी सवार थे, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी सुरक्षित बताए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, “एपामिनोंडास” और “फ्रांसेस्का” फिलहाल ईरानी नियंत्रण वाले क्षेत्र में हैं, जबकि “यूफोरिया” खतरे के क्षेत्र से बाहर निकल चुका है।
बढ़ता समुद्री संकट और वैश्विक असर
ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने पारगमन नियमों का उल्लंघन किया, जबकि कुछ समुद्री सूत्रों के अनुसार कम से कम एक जहाज को पहले से अनुमति मिली हुई थी। इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों की जब्ती और बंदरगाहों की नाकेबंदी के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती यह तनातनी अब वैश्विक समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है, हालांकि भारतीय नाविकों के सुरक्षित होने से फिलहाल राहत जरूर मिली है।















