देहरादून में गंगा संरक्षण और नदी सफाई से जुड़ी परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब केवल कागजी प्रगति दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि योजनाओं के परिणाम धरातल पर दिखाई देने चाहिए।
कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की समीक्षा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी और लापरवाही सामने आई, जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।
‘स्लाइड्स नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम’
बैठक की शुरुआत में ही जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तुतियों और स्लाइड्स में काम दिखाना आसान है, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन नदियों और गंगा तटों पर जाकर ही किया जा सकता है।
उन्होंने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), नाला टैपिंग और अन्य गंगा संरक्षण कार्यों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानकों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि सभी परियोजनाओं की प्रगति वास्तविक रूप से दिखाई देनी चाहिए।
चार साल बाद भी शुरू नहीं हुआ मसूरी का एसटीपी
बैठक में मसूरी के कैमल बैक क्षेत्र में प्रस्तावित 0.70 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का मामला प्रमुखता से उठा। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए वर्ष 2022 में बजट स्वीकृत हो गया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
इसके अलावा अर्केडिया जोन में प्रस्तावित एसटीपी के लिए भूमि चिन्हीकरण और म्यूटेशन की प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया और संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक से गायब अधिकारी पर कार्रवाई
गंगा संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित बैठक में नगर निगम देहरादून का वह अधिकारी अनुपस्थित मिला, जिसे डेयरी अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी प्रस्तुत करनी थी।
इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिंदाल नदी में प्रदूषण रोकने के निर्देश
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि बिंदाल नदी में गिरने वाले कई प्रदूषित नालों की टैपिंग का कार्य अभी तक निर्धारित समय के अनुसार पूरा नहीं हो सका है।
डीएम ने पेयजल निगम को सभी लंबित कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नालों की नियमित सफाई और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। गंगा और अन्य नदियों के किनारे विशेष सफाई अभियान चलाने तथा संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान करने के भी निर्देश दिए गए।
ऋषिकेश के मॉडल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर जोर
बैठक में ऋषिकेश के आवास विकास वार्ड में जीआईजेड और नगर निगम द्वारा संचालित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पायलट प्रोजेक्ट की भी समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू कर इसे मॉडल वार्ड के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही ऋषिकेश में निर्माणाधीन एसटीपी और सीवर लाइन परियोजनाओं को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने के निर्देश भी दिए।
सेलाकुई में स्लज वाहन नहीं होने पर जताई नाराजगी
नगर पंचायत सेलाकुई में स्लज वाहन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने तत्काल स्थानीय संसाधनों से वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
इसके अलावा सभी नगर निकायों को डंपिंग जोन चिन्हित करने, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने और तकनीकी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान अर्धकुंभ मेला 2027 की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मेले से जुड़े सभी निर्माण कार्य राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की अनुमति और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत ही किए जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि गंगा, रिस्पना, आसन और सुसवा सहित कई नदियों के फ्लड जोन का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। जिलाधिकारी ने शेष कार्यों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए ताकि भविष्य की योजनाओं को समय पर लागू किया जा सके।










