पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ‘शहीद दिवस’ रैली से जुड़े कथित अदालत अवमानना मामले में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2025 में आयोजित टीएमसी की वार्षिक रैली से जुड़ा हुआ है, जिस पर हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
ममता और अभिषेक बनर्जी को क्यों भेजा गया नोटिस?
कलकत्ता हाईकोर्ट में हाल ही में एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 21 जुलाई 2025 को आयोजित टीएमसी की शहीद दिवस रैली के दौरान अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरिजित बनर्जी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हुई। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की गई है।
2018 के फैसले का उल्लंघन करने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि टीएमसी की रैली ने कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के उस महत्वपूर्ण आदेश का उल्लंघन किया, जिसमें सभी राजनीतिक दलों को सार्वजनिक मार्गों को पूरी तरह अवरुद्ध न करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय अदालत ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या रैली के दौरान सड़क का एक हिस्सा आम लोगों, वाहन चालकों और आपातकालीन सेवाओं के लिए खुला रहना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजनीतिक दलों की रैलियों और सभाओं को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। उस फैसले में कहा गया था कि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
साथ ही अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि यदि किसी सड़क पर कार्यक्रम आयोजित किया जाए तो वैकल्पिक यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो।
पुलिस को भी दिए गए थे विशेष निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस प्रशासन को यह जिम्मेदारी भी सौंपी थी कि वह मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों को ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी समय पर उपलब्ध कराए।
इसके अलावा अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि किसी राजनीतिक रैली या सभा के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ या कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
याचिका में क्या लगाए गए हैं आरोप?
नई याचिका में दावा किया गया है कि 21 जुलाई 2025 को आयोजित टीएमसी की शहीद दिवस रैली के दौरान कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र स्थित एक महत्वपूर्ण जंक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस वजह से आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और अदालत के पूर्व आदेशों की अनदेखी की गई। इसी आधार पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है।
TMC के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने के आदेश के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें 3 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला कर सकती है।
यदि अदालत को प्रथम दृष्टया आदेशों के उल्लंघन के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह मामला नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।















