उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन में बड़े बदलाव करते हुए वाराणसी और काशी क्षेत्र में नई टीम का ऐलान कर दिया है। लंबे इंतजार के बाद घोषित की गई इस नई टीम में तीनों प्रमुख संगठनात्मक पद ओबीसी (OBC) समाज के नेताओं को सौंपे गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वाराणसी में तीनों प्रमुख पदों पर OBC नेताओं को मिली जिम्मेदारी
बीजेपी ने वाराणसी से जुड़े तीन अहम संगठनात्मक पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति की है। काशी क्षेत्र अध्यक्ष की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया को, महानगर अध्यक्ष का दायित्व प्रदीप अग्रहरि को और जिला अध्यक्ष पद राम शकल पटेल को सौंपा गया है। खास बात यह है कि तीनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं।
इन नियुक्तियों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा ने पूर्वांचल में पिछड़े वर्ग के सामाजिक समीकरणों को साधने पर विशेष फोकस किया है।
मिशन 2027 के लिए पूर्वांचल में OBC समीकरण पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पूर्वांचल में ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे पहले बीते एक दशक में महानगर अध्यक्ष और काशी क्षेत्र अध्यक्ष जैसे पदों पर अन्य वर्गों के नेताओं को भी जिम्मेदारी दी जाती रही है, लेकिन इस बार तीनों प्रमुख पदों पर ओबीसी समाज के नेताओं की नियुक्ति को अहम राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
संगठन में पहले भी हुए बड़े बदलाव
काशी क्षेत्र अध्यक्ष पद पर इससे पहले दिलीप पटेल कार्यरत थे, जिन्हें अब प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिल चुकी है। वहीं, पूर्व जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा प्रदेश सरकार में मंत्री बनाए गए हैं।
हालांकि, पूर्व महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय और पूर्व काशी क्षेत्र अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव अब भी संगठन में किसी बड़े दायित्व का इंतजार कर रहे हैं।
16 जिलों और 71 विधानसभा सीटों पर रहेगी खास नजर
काशी क्षेत्र भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में कुल 16 जनपद और 71 विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में पार्टी ने पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया को सौंपी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पूर्वांचल की इन सीटों पर मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने ओबीसी राजनीति को अपनी रणनीति के केंद्र में रखा है। अब यह देखना होगा कि विधानसभा चुनाव 2027 में यह संगठनात्मक फॉर्मूला पार्टी के लिए कितना प्रभावी साबित होता है।














