ईरान और अमेरिका के बीच संभावित मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान की निष्पक्षता पर अब सवाल उठने लगे हैं। इसकी वजह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ईरान दौरा और वहां दिया गया उनका बयान है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका में भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी प्रशंसा की और कहा कि दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान उन्हें हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध में ईरान के भाइयों और बहनों ने अपनी जान गंवाई है तथा पाकिस्तान और ईरान हर परिस्थिति में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।
शहबाज शरीफ के बयान पर अमेरिका ने जताई नाराजगी
शहबाज शरीफ का यह वीडियो सामने आने के बाद अमेरिका में उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए गए। खासतौर पर पाकिस्तान की उस भूमिका पर चर्चा तेज हो गई, जिसमें वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी मध्यस्थ के लिए निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है और इस तरह के बयान उस भूमिका पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान की भूमिका और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “इस्लामाबाद इस बात को अच्छे से दर्ज कर ले, कि हम सब देख रहे हैं.”
रिक स्कॉट ने अपने बयान में पाकिस्तान के अतीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है, जहां ओसामा बिन लादेन को वर्षों तक पनाह मिली और उसे छिपाकर रखा गया था।
उन्होंने पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के साथ होने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक वहां ईसाइयों के खिलाफ एकतरफा कानून लागू किए जाते हैं और ईशनिंदा से जुड़े मामलों का दुरुपयोग होता है।
अमेरिकी सीनेटर ने आगे कहा कि पाकिस्तान एक ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा कर रहा है जिसे उन्होंने “नरसंहारी और तानाशाह” बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता हमास को पनाह देने वाले कतर से बेहतर नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर बढ़ी बहस
शहबाज शरीफ के ईरान दौरे और उस दौरान दिए गए बयानों के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर नई बहस शुरू हो गई है। खासकर ऐसे समय में, जब वह ईरान और अमेरिका के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, उसके रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।















