नई दिल्ली: NEET परीक्षा विवाद को लेकर हुए संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि बेटे की सुरक्षा को लेकर उन्हें चिंता जरूर है, लेकिन वे उसे आंदोलन छोड़ने या पीछे हटने की सलाह नहीं देंगे।
अभिजीत दीपके के पिता भगवान दीपके ने फोन पर बातचीत में कहा कि संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद स्वाभाविक रूप से बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि उनका मानना है कि यह आंदोलन अभिजीत ने अपने संकल्प से शुरू किया है और ऐसे समय में उसे आंदोलन वापस लेने के लिए कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रदर्शन से निपटने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
वहीं, अभिजीत दीपके की मां अनीता ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “18 से 20 साल के छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है.” उनका कहना था कि छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। अनीता ने बताया कि उन्होंने मोबाइल पर कार्रवाई के वीडियो देखे, जिन्हें देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए और यह पूरी घटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक थी।
गौरतलब है कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सोमवार सुबह पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर 23 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद संसद तक मार्च कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांग NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।
भगवान दीपके ने आरोप लगाया कि छात्रों पर की गई सख्त पुलिस कार्रवाई सरकार के अहंकार को दर्शाती है। उनका कहना था कि आंदोलन में शामिल छात्र पढ़े-लिखे और जिम्मेदार हैं, जिन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और इतने दिनों तक आंदोलन के दौरान कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की कार्रवाई से हिंसा भड़की। भगवान दीपके के अनुसार, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इस तरह लाठीचार्ज किया जाएगा। उनका दावा है कि वहां जो कुछ हुआ, वह सरकार प्रायोजित दंगे जैसा प्रतीत होता है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस लगातार यह कह रही है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हिंसक व्यवहार किया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।















