भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से मुस्लिम नेता प्रोफेसर तारिक मंसूर को भी जगह दी है। तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं। भाजपा के संगठन में उन्हें मिली यह जिम्मेदारी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कुलपति रह चुके हैं। इससे पहले वह जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रिंसिपल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। ओबीसी वर्ग से आने वाले तारिक मंसूर लंबे समय तक शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और अब भाजपा संगठन में उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिली है।
BJP में कब शामिल हुए थे तारिक मंसूर?
तारिक मंसूर वर्ष 2023 से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। अप्रैल 2023 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद पार्टी में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई।
नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही तारिक मंसूर का संगठनात्मक कद और बढ़ गया है। उनके अलावा उत्तर प्रदेश से कुंवर बासित अली को भी भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उन्हें पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
तारिक मंसूर की नियुक्ति के पीछे क्या है BJP की रणनीति?
तारिक मंसूर को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने को केवल मुस्लिम प्रतिनिधित्व के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। वह ओबीसी वर्ग से भी आते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति के जरिए भाजपा एक साथ मुस्लिम और ओबीसी सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में सामाजिक समीकरण चुनावी राजनीति में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा की राष्ट्रीय टीम में तारिक मंसूर और अल्पसंख्यक मोर्चे में कुंवर बासित अली को जिम्मेदारी मिलना पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
UP में BJP के लिए मुस्लिम वोट क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी आबादी है और राज्य की कई विधानसभा सीटों पर उनका चुनावी प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अगर भाजपा मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़ने में सफल होती है तो इसका सीधा असर राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
इससे समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे विपक्षी दलों के पारंपरिक सामाजिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। भाजपा लंबे समय से यह संदेश देती रही है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ धर्म या जाति के आधार पर नहीं दिया जाता।
पार्टी की ओर से ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर जोर दिया जाता रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि सरकार फैसले धर्म और जाति देखकर नहीं करती।
अब नितिन नवीन की नई टीम में तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा की यह रणनीति उत्तर प्रदेश में मुस्लिम और ओबीसी मतदाताओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित होती है।














