उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार, 6 सितंबर 2026 को बाढ़ प्रभावित चित्रकूट पहुंचे। मंदाकिनी नदी के उफान से जिले के 36 गांव प्रभावित हुए हैं। दोपहर करीब 12:30 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर देवांगना एयरपोर्ट पर उतरा। उनके साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद रहे। एयरपोर्ट से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया और इसके बाद रामघाट पहुंचे।
रामघाट पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ से हुए नुकसान का मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इसके साथ ही अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान की जानकारी लेते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।
बाढ़ में क्षतिग्रस्त तुलसीदास की प्रतिमा देखकर जताई चिंता
रामघाट के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री संत तुलसीदास की बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हुई प्रतिमा के पास भी पहुंचे। प्रतिमा को हुए नुकसान की स्थिति देखकर उन्होंने चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से प्रतिमा के जीर्णोद्धार और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।
मंदाकिनी नदी के तेज बहाव के कारण रामघाट समेत आसपास के क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने के साथ राहत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
चित्रकूट के 36 गांव बाढ़ की चपेट में
मंदाकिनी नदी के उफान से चित्रकूट जिले के 36 गांव बुरी तरह प्रभावित बताए गए हैं। बाढ़ के पानी से कई कच्चे और पक्के मकानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं किसानों की खरीफ की फसलें भी जलमग्न हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर रैन बसेरा में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनकी स्थिति जानी। इसके अलावा रामायण प्रेक्षागृह में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री की किट वितरित करने का कार्यक्रम भी है।
रामघाट पर जल पुलिस और गोताखोर तैनात
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए रामघाट पर जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई है। घाट क्षेत्र में नाव, मोटरबोट और जाल के माध्यम से निगरानी की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाना है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को रोका जा सके और जरूरतमंद परिवारों को तत्काल मदद उपलब्ध कराई जा सके।















