उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण को पूरी तरह गलत बताते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ कानून का उल्लंघन किया गया है।
संजय सिंह ने बीजेपी पर चुनाव हारने के डर से उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार जैसे मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं है और इसी वजह से दूसरे मुद्दों को हवा दी जा रही है।
‘1947 से पहले बनी मस्जिद से छेड़छाड़ पूरी तरह गलत’
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने सहारनपुर में गिराई गई मस्जिद को लेकर कहा, “सहारनपुर में जो मस्जिद तोड़ी गई है वो पूरी तरह से गलत है, क्योंकि वह मस्जिद 1947 से पहले की बनी हुई है, 100 साल से ज्यादा वक्त हो गया. 1911 का तो उनके पास बिजली का बिल है. दूसरी बात, वो जमीन जावेद खान और वलीद खान के नाम पर है और तीसरी बात है कि यह वक्फ़ बोर्ड में भी रजिस्टर्ड है.”
AAP सांसद ने दावा किया कि मस्जिद की पुरानी स्थिति, जमीन के दस्तावेज और वक्फ बोर्ड में पंजीकरण जैसे पहलुओं को देखते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं।
‘Places of Worship Act’ और ‘Waqf by User’ का उठाया मुद्दा
संजय सिंह ने आगे कहा, ”दो बातें हैं, देश में ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ (पूजा स्थल कानून) है जो संसद से पारित कानून है, जिसमें लिखा हुआ है कि 1947 से पहले बना हुआ कोई भी मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या गुरुद्वारे के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी. ये साफ तौर से लिखा है. दूसरा ‘वक्फ़ बाय यूजर’ का कानून लागू है. अगर कोई जगह मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह के रूप में इस्तेमाल हो रही है तो उससे भी कोई छेड़छाड़ करने की मनाही है. तो सहारनपुर में दोनों ही कानूनों का उल्लंघन किया गया है.
संजय सिंह ने इसी आधार पर सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
‘BJP के पास शिक्षा और रोजगार पर बात करने के लिए कुछ नहीं’
AAP नेता ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के पीछे राजनीतिक कारण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता के सामने रखने के लिए कोई जवाब नहीं है।
उन्होंने ये भी कहा कि सहारनपुर में मस्जिद इसलिए तोड़ दी गई क्योंकि योगी जी के पास शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोज़गार पर बात करने के लिए कुछ नहीं है. अगर ये लोग दंगे-फसाद, लड़ाई-झगड़े नहीं कराएंगे और प्रदेश में अशांति नहीं फैलाएंगे तो BJP चुनाव जीत नहीं सकती है. ये चुनाव हारने का डर और बौखलाहट दिखा रही है कि बीजेपी लगातार उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहती है.
मुजफ्फरनगर से मेरठ तक के मामलों का किया जिक्र
संजय सिंह ने बीजेपी पर उत्तर प्रदेश में लगातार सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और मेरठ में मस्जिद से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ”यूपी में जो स्कूल बंद हो गए उसे लेकर बीजेपी वालों को कभी आंदोलन करते हुए देखा है, जिसमें बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है? कभी मोमबत्ती में ऑपरेशन हो रहा है और लोग मर रहे हैं, इसे लेकर इनको कभी आंदोलन करते हुए देखा? ये दिनरात सिर्फ प्रदेश का माहौल बिगाड़ने में लगे हैं.”
क्या है Saharanpur Mosque Demolition का पूरा मामला?
बताया गया है कि 5 सितंबर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सहारनपुर प्रशासन ने छह बुलडोजर की मदद से सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी मस्जिद को गिरा दिया था। यह कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद हुई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इमारत को अवैध घोषित करने वाले बेदखली आदेश को सही ठहराया गया था।
मस्जिद गिराए जाने के बाद से ही विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। वहीं, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।















