उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले ग्राम प्रधानों का प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रोश सामने आया है। देहरादून और कालसी क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने देहरादून स्थित पंचायती राज कार्यालय के बाहर धरना देकर अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया। ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर 3 अक्टूबर को सचिवालय कूच करने की चेतावनी दी गई है।
ग्राम प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है और सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े इन मुद्दों पर जल्द फैसला लेना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
ग्राम प्रधानों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग
ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाना शामिल है। संगठन की मांग है कि ग्राम प्रधानों को कम से कम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके साथ ही ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को भी प्रत्येक खुली बैठक में शामिल होने पर मानदेय देने की मांग की गई है।
प्रधानों का कहना है कि पंचायत स्तर पर जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसलिए सरकार से मानदेय की व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की गई है।
मनरेगा में Offline Attendance की मांग
ग्राम प्रधानों ने मनरेगा में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है और कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की सुविधा या तो उपलब्ध नहीं है या बेहद कमजोर है। ऐसे में मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना व्यावहारिक नहीं है।
प्रधानों ने मनरेगा में हाजिरी की व्यवस्था पूरी तरह ऑफलाइन करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे गांवों में रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 600 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये करने की मांग भी रखी गई है।
पंचायतों के लिए Budget बढ़ाने की मांग
ग्राम प्रधानों ने राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि राशि का निर्धारण जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे गांवों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।
संगठन ने जिला योजना में ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उसके मुताबिक जिला योजना के तहत पास होने वाले प्रस्तावों को ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित कराया जाना चाहिए। साथ ही जिला योजना की बैठक में ग्राम प्रधान संगठन को नामित सदस्य के तौर पर शामिल करने की मांग की गई है।
29 विभाग ग्राम पंचायतों को सौंपने की मांग
ग्राम प्रधानों ने पंचायतीराज एक्ट में शामिल सभी 29 विभागों को जल्द से जल्द ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायतों को अधिक अधिकार और जिम्मेदारी मिलने से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
इसके अलावा विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि बनाने की मांग भी की गई है। प्रधानों के अनुसार इससे आपदा, आगजनी जैसी घटनाओं के दौरान राहत कार्य और जरूरी विकास कार्यों के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
10 लाख रुपये तक के काम पंचायत को देने की मांग
ग्राम प्रधानों ने मांग की है कि किसी भी विभाग से स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाया जाए। प्रधानों का कहना है कि इससे गांवों में ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन को रोकने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही पंचायतीराज विभाग की ओर से ग्राम प्रधानों के लिए स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है। संगठन का कहना है कि इससे ग्राम प्रधानों और उनके परिवारों को सुरक्षा मिल सकेगी।
PM Awas की प्राथमिकता सूची में नाम जोड़ने की मांग
प्रधानों ने प्रधानमंत्री आवास प्लस सर्वे 2024 से जुड़ी समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि सूची में नाम होने के बावजूद कई पात्र लोगों के नाम आवास सॉफ्टवेयर से तैयार प्राथमिकता सूची में नहीं आए हैं। इससे जरूरतमंद ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्राम प्रधानों ने ऐसे पात्र लोगों के नाम जल्द प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग की है, ताकि उन्हें आवास योजना का लाभ मिल सके।
100 रुपये Monthly Tax की बाध्यता खत्म करने की मांग
ग्राम प्रधानों ने 16वें वित्त आयोग की नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायतों पर लगाए गए Tax collection के प्रावधान में संशोधन की मांग की है। प्रधानों के अनुसार पंचायतों को प्रत्येक परिवार से 100 रुपये प्रतिमाह यानी 1,200 रुपये सालाना टैक्स वसूलने को कहा गया है।
प्रधानों का कहना है कि निर्धारित टैक्स नहीं वसूलने पर पंचायतों को 16वें वित्त की राशि में सालाना 20 प्रतिशत कटौती का प्रावधान है। उन्होंने इस आदेश में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को टैक्स लगाने की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की है।
ग्राम प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया है कि पांच दिन के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 3 अक्टूबर को सचिवालय कूच किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर प्रदेशभर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।















