दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 50 दिनों तक तनाव और सैन्य टकराव का केंद्र बने इस समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी समाप्त करने का ऐलान किया है, जिसके बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
हमलों के बाद बढ़ा था तनाव
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी थी। इसके चलते इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों, एलपीजी कैरियर्स और अन्य व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी। इसी दौरान ईरानी नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई थीं, जिससे कई जहाज प्रभावित हुए।
40 दिन की जंग के बाद हुआ युद्धविराम
लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच लगभग 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा की गई। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन बाद में IRGC के दबाव के चलते ईरान ने पूरी तरह रास्ता खोलने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने भी क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी थी।
जंग का मैदान बन गया था होर्मुज
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट और उससे सटे समुद्री क्षेत्र सैन्य गतिविधियों का केंद्र बन गए। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर सहित करीब 20 युद्धपोत तैनात कर दिए थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस नौसैनिक बेड़े में लगभग 15 हजार सैनिक शामिल थे। इसी दौरान अमेरिकी और ईरानी नौसेनाओं के बीच कई बार तनावपूर्ण स्थिति और झड़पों की खबरें भी सामने आईं।
कुछ देशों के जहाजों को मिली थी छूट
तनाव के बावजूद ईरान ने शुरुआती दौर में भारत सहित कुछ देशों के तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी थी। बाद में इस सूची का विस्तार भी किया गया।
ईरान लगातार यह दावा करता रहा कि व्यावसायिक जहाजों के लिए मार्ग खुला है, जबकि अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के जहाजों पर प्रतिबंध लागू था। हालांकि इस दौरान भी कुछ जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आती रहीं।
परमिशन और टोल सिस्टम भी किया लागू
बाद में ईरान ने घोषणा की कि होर्मुज से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों को IRGC की अनुमति लेनी होगी। इसके कुछ समय बाद जहाजों से टोल वसूलने की योजना भी लागू की गई।
इसके लिए ईरान ने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) नामक संस्था का गठन किया। साथ ही जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लारक द्वीप के उत्तर और दक्षिण से गुजरने वाला नया समुद्री मार्ग भी जारी किया गया।
ईरान ने जारी किया नया निगरानी नक्शा
इसी महीने ईरान ने एक नया समुद्री निगरानी क्षेत्र घोषित करते हुए विस्तृत नक्शा जारी किया। इस योजना के तहत ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के बड़े हिस्से को अपने निगरानी दायरे में शामिल करने का दावा किया गया।
नई व्यवस्था के अनुसार इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को पहले PGSA से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा ईरान ने ओमान के साथ मिलकर होर्मुज क्षेत्र में एक नई निगरानी और प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की बात भी कही है।
किन इलाकों को किया गया शामिल?
ईरान द्वारा घोषित नए निगरानी क्षेत्र में ओमान की खाड़ी में यूएई के फुजैराह बंदरगाह से लेकर ईरान के कोह-ए-मुबारक तक का क्षेत्र शामिल बताया गया है। वहीं फारस की खाड़ी में ईरान के केशम द्वीप से लेकर यूएई के उम्म-अल-कुवैन तक नई समुद्री सीमा रेखा निर्धारित की गई है।
ईरान का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी होगी। साथ ही होर्मुज मार्ग से वसूले जाने वाले शुल्क को पर्यावरण कर का नाम दिया गया है।















