शिवपाल सिंह यादव ने ‘लोहिया-आम्बेडकर व समाजवाद’ पुस्तक का किया विमोचन, बोले— दोनों महापुरुषों की विचारधारा में थी समानता
लखनऊ, दिनांक 12 अक्टूबर 2026। समाजवादी चिंतक एवं लेखक दीपक मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘लोहिया-आम्बेडकर व समाजवाद’ का विमोचन लोहिया की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में लोहिया सभागार में आयोजित संगोष्ठी में समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने किया। पुस्तक का विमोचन मेहतरानी सुनीता जाटव और मोची गरीबे की उपस्थिति में हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. बी. पांडेय ने की, जबकि संचालन हिंदीविद् प्रो. दीपक राय ने किया।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि डॉ. भीमराव आम्बेडकर और डॉ. राममनोहर लोहिया समदर्शी तथा समान सोच वाले प्रतिबद्ध समाजवादी थे। लोहिया 1942 की क्रांति और गोवा मुक्ति संग्राम के नायक थे। उन्होंने समतामूलक संपन्नता और समावेशी विकास पर जोर दिया, जबकि बाबा साहब आम्बेडकर गणतांत्रिक राजकीय समाजवाद के पैरोकार थे। उन्होंने कहा कि लोग बाबा साहब और लोहिया को मानते तो हैं, लेकिन उन्हें सही मायने में जानते नहीं हैं। दोनों के विचारों को समझने के लिए अध्ययन आवश्यक है।
शिवपाल यादव ने सरकार से समान काम के लिए समान वेतन का फार्मूला लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों को भी नवगठित आउटसोर्सिंग निगम की परिधि में लाया जाना चाहिए। उन्होंने समाजवादी बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र को लोहिया और आम्बेडकर के बीच वैचारिक समानताओं पर आधारित पुस्तक लिखने के लिए बधाई दी।
लोहिया और आम्बेडकर की साझा विरासत पर जोर
पुस्तक के लेखक एवं समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने कहा कि लोहिया और आम्बेडकर की साझा विरासत से ही देश का भला होगा। लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी और बाबा साहब की शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन ने मिलकर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस ऐतिहासिक गठबंधन की घोषणा लोहिया ने 23 दिसंबर 1951 को की थी। उन्होंने कहा कि लोहिया और आम्बेडकर के एक साथ आने की सहमति बन गई थी, लेकिन बाबा साहब के निधन के कारण यह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका।
दीपक मिश्र ने कहा कि लोहिया और आम्बेडकर के अधूरे सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। आज लोहिया के विचारों को आत्मसात करने और समाजवाद पर व्यापक विमर्श की जरूरत है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी बौद्धिक सभा लोहिया की पुण्यतिथि से छह दिसंबर को बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस तक ‘लोहिया-आम्बेडकर विचार यात्रा’ आयोजित करेगी।
सामाजिक न्याय के लिए दोनों का योगदान महत्वपूर्ण
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पूर्व कुलपति एवं दर्शनशास्त्री प्रो. बी. पांडेय ने कहा कि लोहिया और आम्बेडकर की दार्शनिक भावभूमि समान थी। विधिवेत्ता एवं लुआक्ता के अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडेय ने कहा कि दोनों विभूतियों ने सामाजिक न्याय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आम्बेडकर ने संवैधानिक प्रावधानों को प्राथमिकता दी, जबकि लोहिया ने सत्याग्रह और लोकबहसों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन पर जोर दिया।

खुनखुनजी डिग्री कॉलेज की प्राचार्य प्रो. अंशु केडिया ने लोहिया के नारी विमर्श पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में लेखक प्रो. अर्जुन पांडेय, यदु न्यास के अध्यक्ष नागा चौधरी, समाजसेवी रविकांत तिवारी, पूर्व मंत्री रामलखन चौरसिया, इस्लामिया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. दिलशाद अहमद अंसारी, डॉ. नसीम सिद्दीकी, डॉ. मनीष तोड़रिया, प्रो. प्रणव, राजेश अग्रवाल, शांति यादव, रंजीत यादव, प्रो. मोहसिन रजा, जावेद, कुलदीप यादव, अल्पना बाजपेयी और हरिशंकर यादव सहित अन्य लोगों ने विचार रखे।
केरल के समाजवादी नेता को दी श्रद्धांजलि
संगोष्ठी के समापन पर केरल के 104 वर्षीय समाजवादी नेता एवं लोहिया-आम्बेडकर के सहयोगी पुथियारम्बिल कोप्पन वासु के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
आयोजकों ने बताया कि बाबा साहब आम्बेडकर ने बहिष्कृत हितकारिणी सभा का सचिव मोची समुदाय से आने वाले नामदेव शिवतरकर को बनाया था। वहीं, लोहिया ने ग्वालियर की महारानी के विरुद्ध मेहतरानी सुक्खो रानी को चुनाव लड़ाया था। इसी ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित करने के उद्देश्य से पुस्तक का विमोचन सुनीता जाटव और गरीबे की उपस्थिति में कराया गया।















