पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी खींचतान और नेताओं के दल-बदल को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले AIMIM को भाजपा की “बी-टीम” बताकर निशाना साधते थे, आज वही लोग खुद भाजपा के करीब दिखाई दे रहे हैं।
हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (16 जून, 2026) को दिए एक इंटरव्यू में TMC की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी अपने ही नेताओं और सांसदों को रोक पाने में असफल साबित हो रही है।
‘जो हमें गाली देते थे, अब किसे देंगे?’
समाचार एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा कि चुनावों के दौरान AIMIM को लगातार निशाना बनाया गया, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
उन्होंने कहा, “क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि एक पार्टी सत्ता हारने के बाद पूरी तरह से गायब हो गया और उसके 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी? सारे के सारे कबूतर यहां से वहां उड़ गए. ये आपकी पार्टी है और आप हमको गाली दे रहे थे. चुनाव के दौरान भी हमको गाली दे रहे थे, लेकिन अब किसको गाली देंगे.”
ओवैसी का यह बयान TMC के भीतर बढ़ती अस्थिरता और नेताओं के कथित पलायन को लेकर आया है।
भाजपा को रोकने में नाकाम रही TMC: ओवैसी
AIMIM प्रमुख ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने में सफल नहीं हो पा रही है। उनके मुताबिक पार्टी के विधायक और सांसद लगातार साथ छोड़ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर नेतृत्व राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त है।
उन्होंने कहा, “आप भारतीय जनता पार्टी (BJP) को रोक नहीं पा रहे हैं, आपकी पार्टी के विधायक चले गए और सांसद पार्टी छोड़कर जा रहे हैं. कोई आपकी पार्टी पर दावा कर रहा है. आप अपने ही लोगों को रोक नहीं हो पा रहे हैं और आप हम पर सेक्युलरिज्म की पूरी अपनी थिसिस को हम पर फेंकते रहते हैं.”
TMC के आरोपों पर क्या बोले ओवैसी?
जब ओवैसी से पूछा गया कि TMC भाजपा पर उनकी पार्टी को तोड़ने के लिए सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का आरोप लगा रही है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा संभव हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हो सकता है, लेकिन आप बंगाल में 15 सालों तक सत्ता में रहे और 2024 के आम चुनाव में आपके भारी संख्या में उम्मीदवार जीतकर सांसद बनें, फिर ऐसा क्या हो गया?”
ओवैसी ने संकेत दिया कि केवल बाहरी कारणों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी को अपनी आंतरिक कमजोरियों पर भी ध्यान देना चाहिए।
भ्रष्टाचार और कुशासन को बताया बड़ी वजह
ओवैसी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लोगों के बीच तृणमूल कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाने में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और स्थानीय नेताओं के व्यवहार की बड़ी भूमिका रही है।
उन्होंने कहा, “बंगाल की जमीन पर जो मुझे महसूस हुआ है कि ममता बनर्जी का भ्रष्टाचार, उनकी पार्टी का भ्रष्टाचार, उनके पार्टी के सदस्यों की गुंडागर्दी, कुशासन और उनके कोई कनेक्ट नहीं रहा और इसमें वोटर लिस्ट का एसआईआर भी एक मुद्दा है.”
SIR और सुप्रीम कोर्ट जाने पर भी उठाए सवाल
ओवैसी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि मतदाता सूची में कोई खामियां थीं, तो राज्य सरकार को लंबे समय से सत्ता में रहते हुए उन्हें पहले ही दूर कर लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “एसआईआर पिछले साल जून महीने में बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ था और आप पिछले 15 सालों से सत्ता में रहकर उनलोगों के नामों को जोड़ने के लिए क्या-क्या किए? आप जो विसंगतियां थीं, उन्हें कम क्यों नहीं करा पाए?”
साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि केवल कानूनी लड़ाई लड़ने से राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जनता के बीच जाकर विश्वास बहाल करना ज्यादा जरूरी है।















