झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने एनडीए के समर्थन से जीत हासिल कर ली है, जबकि राज्य में सत्ता झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास है। इस परिणाम को महागठबंधन के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है और इसके बाद क्रॉस वोटिंग व अंदरूनी मतभेदों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
परिमल नाथवानी अब चौथी बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी जीत ने झारखंड के राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन हैं परिमल नाथवानी?
गुजरात के जामनगर में जन्मे परिमल नाथवानी का सफर संघर्ष, व्यवसाय और राजनीति का अनोखा मिश्रण माना जाता है। छात्र जीवन से ही उन्होंने कारोबार की दुनिया में बड़ा नाम बनाने का सपना देखा था। इसी सोच के साथ उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसायों से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने शुरुआती करियर में उन्होंने कोल्ड ड्रिंक और साबुन की डीलरशिप जैसे कारोबार किए। इसके अलावा फैक्ट्री संचालन से जुड़े कार्यों में भी हाथ आजमाया। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा।
पीसीओ बिजनेस से शेयर बाजार तक का सफर
1990 के दशक में परिमल नाथवानी ने गुजरात में कई पब्लिक कॉल ऑफिस (PCO) संचालित किए। इसी दौरान उन्हें वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज परिसर में पीसीओ चलाने का अवसर मिला। यहीं से उनकी रुचि शेयर बाजार की ओर बढ़ी।
हालांकि हर्षद मेहता घोटाले के दौरान उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कारोबार में आई इस बड़ी गिरावट ने उनके जीवन को प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नए अवसरों की तलाश जारी रखी।
धीरूभाई अंबानी से मुलाकात बनी टर्निंग प्वाइंट
परिमल नाथवानी के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी मुलाकात रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी से हुई। बताया जाता है कि जामनगर में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की नाराजगी का आकलन करने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी।
उनकी रिपोर्ट और कार्यशैली से प्रभावित होकर धीरूभाई अंबानी ने उन पर भरोसा जताया। इसके बाद जामनगर रिफाइनरी परियोजना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यहीं से रिलायंस समूह के साथ उनका लंबा और प्रभावशाली सफर शुरू हुआ।
रिलायंस में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं
वर्तमान में परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें कंपनी की रणनीतिक योजनाओं और महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़ा प्रमुख चेहरा माना जाता है।
टेलीकॉम क्षेत्र में जियो नेटवर्क के विस्तार के दौरान भी उनके योगदान की चर्चा होती रही है। उद्योगपति मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में भी उनका नाम लिया जाता है।
राजनीति में लगातार बढ़ता प्रभाव
परिमल नाथवानी ने पहली बार वर्ष 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद वे लगातार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे।
वे दो बार झारखंड से और एक बार आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचने में उन्हें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिला था। अब चौथी बार राज्यसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर लिया है।
क्रिकेट प्रशासन और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ाव
व्यवसाय और राजनीति के अलावा परिमल नाथवानी खेल और सामाजिक क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे हैं। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पुनर्निर्माण कार्य की निगरानी भी की गई थी।
इसके अलावा वे पर्यावरण संरक्षण और गिर के एशियाई शेरों के संरक्षण से जुड़े GEET फाउंडेशन के साथ भी जुड़े हुए हैं। धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें द्वारका देवस्थान समिति और नाथद्वारा मंदिर बोर्ड शामिल हैं।
झारखंड की राजनीति में क्यों मचा है बवाल?
परिमल नाथवानी की जीत को केवल एक चुनावी सफलता के रूप में नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में सत्ता पर काबिज महागठबंधन के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार का जीतना अंदरूनी असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग की ओर संकेत करता है।
इसी वजह से झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के भीतर मतभेदों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह परिणाम झारखंड की राजनीति और गठबंधन की रणनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।















