हरिद्वार की श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर देश में वन नेशन वन इलेक्शन लागू होता है तो शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ विकास के कई क्षेत्रों को इसका फायदा मिल सकता है। रामदेव के मुताबिक, हर साल कई महीने चुनावी प्रक्रिया में निकल जाते हैं और इसका असर विकास योजनाओं की रफ्तार पर भी पड़ता है।
स्वामी रामदेव ने विशेष रूप से शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनावी जिम्मेदारियों में शिक्षकों का काफी समय चला जाता है। एक साथ चुनाव होने की स्थिति में शिक्षक बच्चों को अधिक समय दे पाएंगे, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि देश का मतदाता काफी समझदार है और वह केंद्र तथा राज्य में किसे सत्ता सौंपनी है, इसका निर्णय खुद करने में सक्षम है। रामदेव ने यह भी कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
2040 तक विकसित राष्ट्र बने भारत, रामदेव ने रखा अपना लक्ष्य
बाबा रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन उनकी इच्छा है कि भारत इससे पहले यानी 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। उन्होंने विकास को गति देने के लिए राजनीतिक स्थिरता और व्यवस्था में सुधार को महत्वपूर्ण बताया।
रामदेव ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के तरीके पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा करके बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। आंदोलनों में नाबालिग बच्चों को आगे किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
Kangana Ranaut के बयान पर टिप्पणी करने से किया इनकार
कंगना रनौत के एक बयान को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्वामी रामदेव ने उस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी किसी बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़े।
रामदेव ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं है, बल्कि सकारात्मक और देशहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना है।
Vande Mataram को लेकर भी स्वामी रामदेव ने रखी राय
वंदे मातरम को लेकर स्वामी रामदेव ने कहा कि जो लोग इसमें देवी-देवताओं या मंदिर की पूजा से जुड़ा विवाद तलाशते हैं, उन्हें इसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए भारत माता ही दुर्गा हैं, भारत माता ही लक्ष्मी हैं और भारत माता ही विद्या का स्वरूप हैं.”
रामदेव ने कहा कि उनके लिए भारत माता केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं हैं, बल्कि आस्था, संस्कृति, कर्तव्य और जीवन मूल्यों का प्रतीक हैं। उन्होंने वंदे मातरम को भारत माता के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति बताया।
जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव पर जताई चिंता
स्वामी रामदेव ने समाज में जाति और वर्ग के नाम पर होने वाले भेदभाव तथा एक-दूसरे को अपमानित करने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग या समुदाय के व्यक्ति का अपमान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने एससी, एसटी, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण और संन्यासी समेत विभिन्न सामाजिक वर्गों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी के भी सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। रामदेव ने सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान को समाज के लिए जरूरी बताया।















