निसार अहमद
रतनपुरा – मऊ जनपद मऊ के रतनपुरा विकास खण्ड के समीप संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित होता था, बताते चलें कि यह स्वास्थ्य केंद्र आजादी के बाद का पहले घोषित होने वाले विकास खण्ड रतनपुरा के साथ ही घोषित किया गया था।जिसका शिलान्यास तत्कालीन नियोजन उपमंत्री फूल सिंह द्वारा दिनांक 22-2-1953 को किया गया। वर्ल्ड बैंक की प्रोजेक्ट स्कीम में मातृ-शिशु कल्याण केन्द्र सितंबर 1989/90 में उच्चीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनपुरा का श्रृजन एवं स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत यहां जनपद बलिया के नरहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से स्थानांतरित एवं पदोन्नत होकर आए डाक्टर एस एन पाठक को अधीक्षक के रूप में पदभार दिया गया था।

उसी शासनादेश में यह अंकित था उच्चीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य पर तैनात अधीक्षक उपमुख्य चिकित्साधिकारी के पद के समतुल्य होंगे तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुरा पर कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी इनके नियंत्रण में होंगे तथा उनके सभी देय का भुगतान अधीक्षक द्वारा ही किया जाएगा।बाद में उच्चीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जो रतनपुरा कस्बा से लगभग दो किलोमीटर दूर जोगापुर में बना तो इस चिकित्सालय के दुर्दिन शुरू होगया। पूर्व में यहां आकस्मिक चिकित्सा इकाई का संचालन होता था बाद में वह भी बन्द कर दिया गया। जिसका परिणाम हुआ कि यहां बने भवन और चिकित्सा कर्मियों के आवास जर्जर होते जा रहे हैं। जब यह भवन ठीक ठाक हालत में थे तभी आनन-फानन में इन भवनों को काग़ज़ में निष्प्रयोज्य दिखा दिया गया। कहने के लिए यहां आयुष्मान आरोग्य सेंटर एक कमरे का निर्माण कराकर संचालित किया जा रहा है,जो मुख्य बाजार रतनपुरा के चिकित्सकीय उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। धीरे-धीरे यहां पर बनी चहारदीवारी भी जर्जर हो कर गिरने लगी है।बार बार यहां की दुर्दशा को दूर करने के लिए शासन एवं सरकार से अनुरोध किया जाता है लेकिन यहां की समस्याओं को तथा लोगों की कठिनाइयों को दूर करने हेतु ध्यान नहीं दिया गया। जो किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता है।

इस विकास खण्ड में कहने को तो आयुर्वेद और होमियोपैथी चिकित्सा के कई राजकीय अस्पताल संचालित हैं। इस विकास खण्ड रतनपुरा क्षेत्र में संचालित आयुर्वेद चिकित्सालय ग्राम पंचायत भीमहर, गहनी, पहसा,मखना आदि हैं।यूनानी अस्पताल ग्राम पंचायत नगवां आदि ग्राम सभाओं में संचालित हैं। खालिसपुर ,सिधवल, मानिकपुर आदि में होमियोपैथिक चिकित्सालय संचालित किए गए हैं लेकिन उपरोक्त चिकित्सालय अधिकांशतः भाड़े के मकानों में चलते हैं जहां मरीजों को भर्ती करने की कोई सुविधा/व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि उन अस्पतालों में चिकित्सकों और उनके मातहत कर्मचारियों की मानक के अनुसार तैनाती भी नहीं है।यदि सरकार वास्तव में मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है तो रतनपुरा बाजार में स्थित पुराने चिकित्सालय के प्रांगण में पूर्व की तरह आकस्मिक चिकित्सालय का कार्य प्रारंभ किया जाय, अथवा उच्चीकृत प्राथमिक आयुष एवं होमियोपैथी चिकित्सालय का निर्माण कार्य शुरू किया जाना उचित होगा अथवा नेत्र चिकित्सालय की भी स्थापना की जा सकती है।जिससे भूमि संरक्षण के साथ साथ क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक एवं पुरानी चिकित्सा पद्धति के द्वारा इलाज उपलब्ध कराकर राहत दी जा सकती है।
















