नई दिल्ली। चीन ने अपने रेयर अर्थ (Rare Earth) तत्वों और मैग्नेट्स के निर्यात पर नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब ड्रैगन चाहता है कि इन तत्वों का इस्तेमाल केवल स्थानीय जरूरतों के लिए ही किया जाए और इन्हें रक्षा या सेमीकंडक्टर उद्योगों में विदेशों में इस्तेमाल करने पर रोक रहे। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने भारत से यह गारंटी मांगी है कि उसे भेजे जाने वाले हेवी रियर अर्थ मैग्नेट्स (Heavy Rare Earth Magnets) अमेरिका को नहीं भेजे जाएंगे और केवल भारत में ही इस्तेमाल होंगे। हालांकि, भारत ने अब तक इस शर्त को स्वीकार नहीं किया है।
चीन के पास 90% से अधिक प्रोसेसिंग क्षमता
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया में सबसे बड़ा रेयर अर्थ एलिमेंट्स उत्पादक देश है और इसके पास लगभग 90% से अधिक प्रोसेस्ड मैग्नेट्स की क्षमता है। ये रेयर अर्थ तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, एयरक्राफ्ट इंजन और सैन्य रडार जैसे हाई-टेक उपकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम उसकी वैश्विक तकनीकी और रक्षा प्रभुत्व को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी तकनीक और महत्वपूर्ण संसाधन प्रतिस्पर्धी देशों तक न पहुंचें।
अमेरिका से डील पर विचार कर रहा चीन
एक सूत्र ने बताया, “हमारी जानकारी के अनुसार, चीन अमेरिका के साथ हेवी रियर अर्थ मैग्नेट्स को लेकर किसी समझौते पर विचार कर रहा है। लेकिन वह बिना यह गारंटी लिए कि ये कहीं और नहीं जाएंगे, सप्लाई जारी रखने को तैयार नहीं है।”
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग साउथ कोरिया में मुलाकात करने वाले हैं — ऐसे में यह कदम चीन की राजनयिक दबाव नीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
क्या चाहता है चीन?
चीन ने हाल में रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर जो नए नियंत्रण नियम लागू किए हैं, उन्हें अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक वार्ता में सौदेबाजी के हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, चीन चाहता है कि निर्यात के लिए देशों से वैसी ही सख्त गारंटी (End-User Assurance) ली जाए जैसी Wassenaar Arrangement में होती है — यानी उत्पाद का इस्तेमाल सिर्फ तय उद्देश्यों के लिए किया जाए।
भारत ने दी एंड-यूज़र सर्टिफिकेट, पर गारंटी से इंकार
भारतीय कंपनियों ने चीन को एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (End-User Certificate) सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि इन मैग्नेट्स का इस्तेमाल किसी हथियार निर्माण प्रक्रिया में नहीं किया जाएगा।
हालांकि, भारत ने चीन की उस मांग को मानने से इंकार किया है, जिसमें यह कहा गया था कि भारत यह गारंटी दे कि मैग्नेट्स किसी तीसरे देश — खासकर अमेरिका — को नहीं भेजे जाएंगे।
वसेनार समझौते का संदर्भ
चीन वसेनार एग्रीमेंट (Wassenaar Arrangement) का सदस्य नहीं है, जबकि भारत इस समूह का हिस्सा है।
यह समझौता 42 देशों के बीच डुअल-यूज तकनीक और वस्तुओं के सुरक्षित हस्तांतरण को सुनिश्चित करता है ताकि संवेदनशील तकनीक का दुरुपयोग न हो सके।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह नया कदम न केवल भारत बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक रणनीतिक झटका साबित हो सकता है।














