बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। मौजूदा प्री-पोल अलायंस के अनुसार, NDA ने कुल 202 सीटें जीती हैं, जिसमें BJP को 89, JDU को 85, LJP(R) को 19, HAM को 5 और RLM को 4 सीटें मिली हैं।
बिहार की राजनीति में पहली बार बीजेपी उस स्थिति में आती दिख रही है, जहां वह अगर चाहे तो जनता दल यूनाइटेड (JDU) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिना भी सरकार बना सकती है। इसके लिए बीजेपी राज्य में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का ‘साम-दाम-दंड-भेद’ फॉर्मूला इस्तेमाल कर सकती है।
नीतीश को बाहर करने पर संख्या बल का गणित
अगर NDA के मौजूदा संख्याबल (202 सीटों) में से JDU की 85 सीटें बाहर निकाल दी जाएं, तो यह संख्या 117 तक पहुंचती है।
- मौजूदा BJP गठबंधन (JDU के बिना): 117 सीटें
- अन्य संभावित समर्थन: अगर बीजेपी बहुजन समाज पार्टी (BSP) और एक निर्दलीय उम्मीदवार (IIP- निर्दलीय इंडिपेंडेंट पार्टी) के एक-एक विधायक को अपने पाले में कर ले, तो यह संख्या 119 तक पहुंच जाएगी।
यह संख्या बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से महज़ तीन सीटें कम रहेगी।
कामयाबी की गारंटी वाले तीन संभावित ऑप्शन
सियासी अनुभव के आधार पर यह माना जा रहा है कि BSP और IIP के विधायक बीजेपी के साथ आसानी से आ जाएंगे, क्योंकि पिछली बार भी BSP के एकमात्र विधायक सत्ता पक्ष के रथ पर सवार हुए थे। बहुमत के लिए बाकी तीन सीटों को साधने के लिए तीन प्रमुख विकल्प हैं:
| विकल्प | तरीका | व्यवहार्यता (Feasibility) |
| पहला ऑप्शन | लेफ्ट और AIMIM को तोड़ना: Left (वामपंथी) विचारधारा की पार्टी होने के कारण इनके विधायकों को तोड़ना ‘हिमालय में सुराख करने’ जैसा मुश्किल है। AIMIM एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ हो सकता है, लेकिन अभी यह खेल नामुमकिन लग रहा है। | मुश्किल |
| दूसरा ऑप्शन | कांग्रेस पार्टी को तोड़ना: कांग्रेस पार्टी के पास सिर्फ 6 विधायक हैं। इनमें से कुछ विधायकों को अपनी ओर मिलाना या इस्तीफे दिलाना अपेक्षाकृत आसान है। | आसान |
| तीसरा ऑप्शन | JDU या RJD को तोड़ना/इस्तीफे दिलाना: JDU और RJD के कुछ विधायकों के इस्तीफे दिलाकर विधानसभा की कुल ताकत को कम कर दिया जाए। इससे सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 122 से घटकर कम हो जाएगा। | आसान |
दूसरा और तीसरा ऑप्शन आसानी से कामयाब हो सकता है, जिससे फटाफट सरकार बनाने का रास्ता मुमकिन है। अतीत में बीजेपी का मौजूदा नेतृत्व, खासकर महाराष्ट्र में, यह काम बड़ी कामयाबी और आसानी से कर चुका है।
लेकिन… एक बड़ा पेंच है!
हालांकि सरकार गठन मुमकिन है, लेकिन इसमें एक बड़ा पेच है: केंद्र की मौजूदा गठबंधन सरकार JDU के समर्थन पर टिकी है। इसलिए, बीजेपी नेतृत्व फिलहाल ऐसे किसी खेल को हरी झंडी न दे सकता है, लेकिन यह फॉर्मूला नीतीश कुमार को काबू में रखने और उन पर अपना पूरा कंट्रोल रखने के लिए जरूर इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है ‘महाराष्ट्र और MP का फॉर्मूला’?
‘महाराष्ट्र और MP का फॉर्मूला’ साम-दाम-दंड-भेद यानी किसी भी कीमत पर, कैसे भी सरकार का गठन करना है। इसका मतलब है कि विपक्षी पार्टी के कुछ विधायकों को अपनी ओर मिला लेना या किसी बड़े दल में कुछ विधायकों के इस्तीफे दिला दिए जाएं।
- महाराष्ट्र: 2019 के चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन शिवसेना और एनसीपी के दो गुटों से मिलकर और तोड़-जोड़कर सरकार चलाई।
- मध्य प्रदेश: 2018 के चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन साम-दाम-दंड-भेद के जरिए बीजेपी की सरकार बना दी गई।
यह याद रहे कि जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता थी, तो वह इस खेल की माहिर खिलाड़ी रही है। मुमकिन है बीजेपी ने यह खेल कांग्रेस से ही सीखा हो।














