उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक लेखपाल पर रिश्वत न मिलने पर किसान की खड़ी गन्ने की फसल नष्ट कराने का आरोप लगा है। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
यह पूरा मामला सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के मांझारायपुर गांव का है। यहां के किसान राजेश निषाद और उनके भाई तिलकराम ने क्षेत्रीय लेखपाल ज्ञान प्रकाश पांडेय पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जमीन की पैमाइश के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। किसानों का कहना है कि उनके पास डिजिटल भुगतान के प्रमाण और कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित किसानों के अनुसार, वे गाटा संख्या 1190, 1191, 1199, 1194, 1195 और 1196 पर वर्षों से खेती कर रहे हैं। आरोप है कि पड़ोसी पक्ष उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान लेखपाल ने सही पैमाइश के बदले रिश्वत की मांग की।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई- किसान
किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने पूरी रकम देने से इनकार किया, तो 10 अप्रैल 2026 को लेखपाल ने विपक्षी पक्ष से मिलकर गलत पैमाइश कर दी और खेत में खूंटे गड़वा दिए। इसके बाद 11 अप्रैल को उन्हें फिर धमकी दी गई कि यदि पूरी रकम नहीं दी गई तो फसल और जमीन दोनों से हाथ धोना पड़ेगा।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने दबाव में आकर 9 हजार रुपये नकद और 12 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए, जिसके डिजिटल प्रमाण उनके पास मौजूद हैं। इसके बावजूद शेष रकम न मिलने पर 17 अप्रैल 2026 की रात में आरोपितों ने ट्रैक्टर चलाकर खेत में खड़ी गन्ने की फसल को जोतकर नष्ट कर दिया।
घटना के बाद पीड़ितों ने 15 अप्रैल को उपजिलाधिकारी सिरौलीगौसपुर और 18 अप्रैल को थाना टिकैतनगर में लिखित शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे पहले 31 मार्च को भी धमकी को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।
DM ने दिए जांच के आदेश, सबूतों से मामला और गंभीर
इस मामले में खास बात यह है कि पीड़ित किसानों के पास डिजिटल भुगतान के स्क्रीनशॉट और कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिससे आरोप और गंभीर हो गए हैं। किसानों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या पीड़ित किसानों को न्याय मिल पाता है।













