बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ऐतिहासिक जीत दर्ज हुई, जिसने तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के सभी दांवों को बुरी तरह से पछाड़ दिया। NDA ने कुल 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इस जीत में बीजेपी ने 101 सीटों पर लड़कर 89 सीटें जीतीं, जबकि जेडीयू ने 101 सीटों पर लड़कर 85 सीटें जीतीं—जो कि 2020 के 43 सीटों के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं। दूसरी ओर, 2020 में सबसे बड़ी पार्टी रही आरजेडी इस बार महज 25 सीटों पर सिमट गई।
हालांकि, आरजेडी के लिए राहत की एकमात्र बात यह रही कि उसे इस चुनाव में भी सबसे ज्यादा 1.15 करोड़ वोट मिले, जबकि बीजेपी को 1 करोड़ और जेडीयू को 97 लाख वोट प्राप्त हुए।
आइए जानते हैं, वो कौन से 5 फैक्टर थे जिन्होंने बीजेपी और नीतीश कुमार को यह ऐतिहासिक जीत दिलाई:
NDA की प्रचंड जीत के 5 सबसे बड़े गेमचेंजर फैक्टर
1. महिलाओं के खाते में ₹10 हजार: बड़ा गेमचेंजर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगातार महिलाओं को अपने जनाधार के केंद्र में रखा है। पहले 10वीं पास छात्राओं को साइकिल और सहायता राशि, फिर शराबबंदी और सरकारी नौकरियों (पुलिस भर्ती सहित) में 35-35 फीसदी आरक्षण देकर उनका भरोसा जीता। चुनाव से ठीक पहले उनकी सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1.13 करोड़ महिलाओं के खाते में ₹10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए, जो निर्णायक वोटिंग पैटर्न का एक बड़ा गेमचेंजर साबित हुआ।
2. ‘जंगलराज’ और ‘कट्टा सरकार’ की चेतावनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान हर रैली में जनता को लालू यादव और राबड़ी देवी के समय के ‘जंगलराज’ और ‘कट्टा सरकार’ की याद दिलाई। पीएम मोदी ने कानून-व्यवस्था को लेकर तेजस्वी यादव पर कड़ा प्रहार किया। उनकी इस चेतावनी को फर्स्ट टाइम वोटर, महिला वोटर्स और शहरी वोटर्स ने गंभीरता से लिया। ‘जंगलराज’ शब्द के लगातार इस्तेमाल से सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना और ‘सुशासन बाबू’ के रूप में नीतीश कुमार की पहचान और मजबूत हुई।
3. 125 यूनिट तक फ्री बिजली योजना
नीतीश कुमार सरकार ने मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत राज्य में 125 यूनिट तक फ्री बिजली मुहैया कराने का ऐलान किया, जिसका लाभ 1.67 करोड़ परिवारों को मिलेगा। यह ऐलान भी अगस्त महीने में किया गया था। इस फ्री योजना ने जाति, वर्ग और धर्म की सीमाओं को तोड़ते हुए एक बड़ा लाभार्थी वर्ग तैयार किया और नीतीश सरकार के पक्ष में मतदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. नीतीश कुमार की बेदाग छवि
करीब 20 सालों से सत्ता में रहने के बावजूद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पूरी तरह बेदाग है। उनके ऊपर न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष के किसी नेता ने कभी भ्रष्टाचार का कीचड़ नहीं उछाला। गठबंधन बदलने के बावजूद उनकी यह साफ-सुथरी छवि बरकरार रही और बिहार की जनता उन्हें ‘सुशासन बाबू’ के रूप में देखती है, जिसने निर्णायक नतीजे दिए।
5. विकास कार्यों और ‘विकास पुरुष’ की पहचान
नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद बिहार में सड़कों, हाईवे, रेलवे ब्रिज, ओवरब्रिज समेत कई तरह के विकास कार्य हुए। उनके कार्य करने की गति की वजह से उन्हें ‘विकास पुरुष’ का तमगा मिला। कानून-व्यवस्था में सुधार होने के कारण विकास कार्यों में तेजी आ सकी, जिसने राज्य की पुरानी ‘पिछड़ेपन’ की छवि को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।














