उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की हालिया बैठक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे क्षेत्रों को इको टूरिज्म का हब बनाने के उद्देश्य से कई नई योजनाओं के प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय व्यंजनों और वन्यजीव सफारी को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शामिल हैं। यूपी इको टूरिज्म की इन पहलों से स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान व समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
प्रमुख पहलें और प्रस्ताव
1. कतर्नियाघाट में नदी सफारी का विस्तार
- 現状: नेपाल सीमा क्षेत्र में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में गेरुआ नदी पर वर्तमान में वन विभाग द्वारा दो बोटों का संचालन किया जा रहा है।
- प्रस्ताव: पर्यटकों की बढ़ती मांग को देखते हुए इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने दो अतिरिक्त बोटों के संचालन की योजना पेश की है, जिससे नदी सफारी की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
- पर्यावरण अनुकूलन: बोर्ड ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इन बोटों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से लैस करने पर जोर दिया है।
2. ‘अनुभव – थारू संस्कृति’ योजना
यूपी इको टूरिज्म विकास बोर्ड ने दुधवा राष्ट्रीय उद्यान व कतर्निया घाट के तराई क्षेत्र में रहने वाली थारू जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने वाली ‘अनुभव – थारू संस्कृति’ योजना का प्रस्ताव पेश किया है, जो पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करेगा और थारू समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- थारू थाली का प्रचार: बोर्ड ‘थारू थाली’ को सक्रिय रूप से प्रचारित कर रहा है, जो स्थानीय जड़ी-बूटियों और अनाज से तैयार पारंपरिक व्यंजनों से युक्त है। क्षेत्र के होटलों और रिसॉर्ट्स संचालकों को इसे अपने मेन्यू में अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
- प्रशिक्षण: टूरिज्म बोर्ड ने थारू समुदाय के युवाओं व महिलाओं को खान-पान और आतिथ्य कला सिखाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की भी योजना बनाई है।
3. चंदन चौकी शिल्पग्राम का पुनर्विकास
- केंद्र: जनजातीय विकास विभाग द्वारा निर्मित चंदन चौकी शिल्पग्राम वर्तमान में बंद पड़ा है।
- प्रस्ताव: दुधवा क्षेत्र में स्थित इस केंद्र को थारू और अन्य जनजातीय संस्कृति के कौशल व कला के प्रदर्शन स्थल के रूप में पुनः विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- संचालन मॉडल: बोर्ड ने सुझाव दिया कि जनजातीय विकास विभाग की सहमति से पर्यटन विभाग, इकोटूरिज्म बोर्ड या पर्यटन निगम इसे निजी निवेश के माध्यम से संचालित करेगा, जिससे इको-टूरिज्म को नया आयाम मिलेगा।
इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से सीएम योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म का हब बनाने की कार्ययोजना को बल मिलेगा, साथ ही राजस्व वृद्धि और थारू जनजाति के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।














