लोकसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर राष्ट्रीय गीत के प्रति मुहम्मद अली जिन्ना की सोच को समर्थन देने का आरोप लगाया और कहा कि हर भारतीय को तिरंगे के आगे झुकना होगा।
पीएम मोदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने कहा कि नेहरू ने एक बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लिखा था कि वंदे मातरम् मुसलमानों को भड़का और चिढ़ा सकता है, और इसके इस्तेमाल पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया था।
‘सिंहासन डोलता दिखा तो नेहरू ने पड़ताल शुरू कर दी’
पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के विरोध की राजनीति को मुस्लिम लीग से जोड़ा। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् के प्रति मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज होती जा रही थी। मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1937 को वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया।”
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इसके बाद, “फिर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जवाब देने और निंदा करने की बजाय, उल्टा वंदे मातरम् की पड़ताल शुरू कर दी।”
नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी चिट्ठी
पीएम मोदी ने नेहरू के फैसले को प्रमाणित करने के लिए एक ऐतिहासिक पत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जिन्ना के विरोध के 5 दिन बाद ही 20 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखी और जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम् की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को भड़का सकती है।”
इसके तुरंत बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई और 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता कर लिया।
‘कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए’
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के साथ समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पूरे देश में इस प्रस्ताव के विरोध में लोगों ने प्रभात फेरियां निकालीं, लेकिन दुर्भाग्य से 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता कर लिया, वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए।”
उन्होंने कहा कि उस फैसले के पीछे इसे सामाजिक सद्भाव का नकाब पहनाया गया, लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हिंदुस्तान में रहने वाले हर शख्स को तिरंगे के आगे झुकना होगा।”
वंदे मातरम् चट्टान की तरह अडिग रहा
पीएम मोदी ने राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व को बताते हुए कहा, “एक समय था जब बंगाल की बौद्धिक शक्ति पूरे राष्ट्र का मार्गदर्शन और प्रेरणा करती थी। अंग्रेज समझते थे कि बंगाल की शक्ति ही भारत की शक्ति का केंद्र बिंदु है इसीलिए उन्होंने सबसे पहले बंगाल को विभाजित करने का प्रयास किया।”
उन्होंने निष्कर्ष निकाला, “1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन कर दिया, लेकिन वंदे मातरम् चट्टान की तरह अडिग रहा। बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् एक गूंजती हुई पुकार बन गया, जो गली-गली गूंजती रही।”














