मऊ/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘सेमीफाइनल’ माने जा रहे घोसी उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग ने अभी तारीखों का ऐलान भी नहीं किया है, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी चाल चल दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेलते हुए दिवंगत विधायक सुधाकर सिंह के पुत्र सुजीत सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसे सपा की ‘सहानुभूति लहर’ को कैश करने और भाजपा को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति माना जा रहा है।
बेटे को टिकट: विरासत और जज्बात का संगम
घोसी सीट सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई है। सुधाकर सिंह की क्षेत्र में मजबूत पकड़ थी और वे चार बार विधायक रहे। पार्टी ने उनके बेटे को मैदान में उतारकर भावनात्मक कार्ड खेला है।
- सुजीत सिंह का बयान: टिकट मिलने पर सुजीत सिंह ने कहा, “पिता का साया सिर से उठने के बाद घोसी की जनता ही अब मेरा सबसे बड़ा सहारा है.”
- सपा की रणनीति: सपा को भरोसा है कि सुधाकर सिंह की वफादारी (दो बार निष्कासन के बाद भी पार्टी न छोड़ना) और उनके निधन से उपजी सहानुभूति का सीधा फायदा सुजीत को मिलेगा।
BJP के लिए क्यों है यह ‘नाक की लड़ाई’?
भाजपा के लिए घोसी की राह आसान नहीं दिख रही है। पिछले आंकड़े पार्टी के लिए चिंता का विषय हैं:
- 2022 विधानसभा चुनाव: सपा के दारा सिंह चौहान ने भाजपा को 22,216 वोटों से हराया था।
- 2023 उपचुनाव: जब दारा सिंह भाजपा में आए और उपचुनाव लड़ा, तो सपा के सुधाकर सिंह ने उन्हें 42,672 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया था।
अब भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह किसी नए चेहरे पर दांव लगाए या पुराने समीकरणों के साथ जाए। सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि सीट को लेकर अभी भाजपा नेतृत्व से बात होनी बाकी है।
गठबंधन और विपक्ष का क्या है प्लान?
जहां एक तरफ भाजपा जिला अध्यक्ष रामसहाय मौर्य संगठन की तैयारी का दावा कर रहे हैं, वहीं ‘इंडिया गठबंधन’ के तहत कांग्रेस का रुख भी साफ है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष राज मंगल यादव ने कहा है कि शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया जाएगा, यानी सपा को समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है। ऐसे में अगर वन-टू-वन फाइट होती है, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा। सियासी पंडित इसे 2027 का नॉरेटिव सेट करने वाला चुनाव मान रहे हैं।














