अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा देने के लिए नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर दिल्ली पहुंच चुके हैं। ट्रम्प के बेहद करीबी और उनका ‘दाहिना हाथ’ माने जाने वाले गोर औपचारिक रूप से 12 जनवरी को भारत में अमेरिकी दूतावास का कार्यभार ग्रहण करेंगे। अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलने और शपथ लेने के बाद उनकी यह नियुक्ति कूटनीतिक हलकों में बेहद अहम मानी जा रही है। उन्हें सिर्फ राजदूत ही नहीं, बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका का विशेष दूत भी बनाया गया है।
भारत लौटकर जताई खुशी, पीएम मोदी से है पुराना नाता
दिल्ली की धरती पर कदम रखते ही सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा, “भारत वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है. हमारे दोनों देशों के लिए आगे अविश्वसनीय अवसर हैं.”
गौर करने वाली बात यह है कि सर्जियो गोर भारत के लिए नए नहीं हैं। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी वह भारत के दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। उस समय पीएम मोदी से मिलने के बाद उन्होंने कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी से मिलना सम्मान की बात है. आने वाले महीनों में भारत के साथ हमारा रिश्ता और मजबूत होगा.”
ट्रम्प ने बताया था ‘सच्चा दोस्त’ और भरोसेमंद साथी
सर्जियो गोर की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजदूत बनने से पहले वह ट्रम्प प्रशासन में ‘हेड ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल अपॉइंटमेंट्स’ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी नियुक्ति के वक्त खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर उनकी तारीफों के पुल बांधे थे। ट्रम्प ने कहा था, “सर्जियो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. वह कई सालों से मेरे साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने मेरे ऐतिहासिक चुनाव अभियान में काम किया है और मेरी सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबें प्रकाशित की हैं. दक्षिण और मध्य एशिया के लिए मुझे ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जिस पर मैं पूरा भरोसा कर सकूं और जो मेरे एजेंडे को आगे बढ़ा सके. सर्जियो गोर एक बेहतरीन राजदूत साबित होंगे.”
उज्बेकिस्तान में जन्म, अमेरिका में सियासत
महज 39 साल की उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले सर्जियो गोर का जन्म 1986 में उज्बेकिस्तान में हुआ था। साल 1999 में उनका परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट गोर को अमेरिकी राजनीति का लंबा अनुभव है। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा, सीनेट और कई राष्ट्रपति अभियानों में रणनीतिक भूमिका निभा चुके हैं। 85 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके गोर कई भाषाओं के जानकार हैं।
ट्रेड डील और वीजा वेटिंग पर होंगी निगाहें
सर्जियो गोर ऐसे वक्त में कमान संभाल रहे हैं जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) अधर में लटका है। फरवरी 2025 से जारी बातचीत और अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बीच इस डील को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों के लिए अमेरिकी वीजा का लंबा वेटिंग टाइम कम करना भी उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल होने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि ट्रम्प के इस भरोसेमंद दूत के आने से ‘क्वाड’ सम्मेलन और खुद डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे की राह कितनी आसान होती है।













