इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है। कई घंटों तक चली इस बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई और अंततः वार्ता समाप्त कर दी गई।
पाकिस्तान के तेल टैंकरों को लौटना पड़ा
इसी बीच पाकिस्तान के दो तेल टैंकर ‘शालमार’ और ‘खैरपुर’ को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। ये दोनों जहाज अरब सागर से होते हुए होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अचानक उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि, उन्हें रोके जाने का स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
IRGC के ‘सेफ रूट’ से गुजरने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार ये दोनों टैंकर फारस की खाड़ी की ओर जा रहे थे और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) द्वारा निर्धारित ‘सेफ रूट’ का इस्तेमाल करना चाहते थे। लेकिन अचानक उनकी वापसी ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
वार्ता के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल
इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। वार्ता समाप्त होने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया, जबकि इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद छोड़ चुके थे।
71 सदस्यीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल शामिल
इस वार्ता में ईरान की ओर से 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था, जिसमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। वार्ता खत्म होने के बाद पूरा दल अपने देश लौट गया।
अमेरिका पर ईरान का तीखा हमला
घाना स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका अपने उपराष्ट्रपति को इस्लामाबाद लेकर आया, 21 घंटे बातचीत हुई, लेकिन ईरान ने उन मांगों को मानने से इनकार कर दिया जो जंग में भी हासिल नहीं हो सकती थीं. बयान में कहा गया कि बातचीत खत्म हो चुकी है, स्ट्रेट अभी भी बंद है और अमेरिका खाली हाथ लौट रहा है.
‘स्टॉपवॉच बनाम कैलेंडर’ से बढ़ा विवाद
एक यूजर के सवाल पर ईरानी दूतावास ने जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका समय का दबाव बनाकर बातचीत करना चाहता था, जबकि ईरान लंबी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा था। ईरान का कहना है कि उसका लक्ष्य जल्दबाजी में समझौता करना नहीं, बल्कि धैर्य के साथ समाधान निकालना है।
अमेरिका पर अविश्वास कायम
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि उनका देश अमेरिका के पुराने वादों को नहीं भूला है। उन्होंने कहा कि भविष्य की किसी भी वार्ता में ईरान पूरी सतर्कता बरतेगा और किसी एक बैठक में नतीजे की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बाद होर्मुज स्ट्रेट और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। तेल टैंकरों की वापसी और वार्ता की विफलता ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता की आशंका को और गहरा कर दिया है।














