तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के नाम पर अगर डिलिमिटेशन के जरिए दक्षिण भारत के साथ राजनीतिक अन्याय किया गया, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना व्यापक सहमति के लिया गया कोई भी फैसला देश की एकता और लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का समर्थन
रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि Indian National Congress महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय से ही महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर कांग्रेस ने सशक्तिकरण की नींव रखी थी और बाद में पंचायत व नगर निकायों में भी महिलाओं को आरक्षण दिया गया।
पीएम मोदी से की अपील
मुख्यमंत्री ने Narendra Modi से अपील करते हुए कहा कि अगर सरकार महिला आरक्षण विधेयक लाती है, तो कांग्रेस उसे तुरंत समर्थन देगी, ताकि महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में लोकसभा सीटों के पुनर्गठन यानी डिलिमिटेशन के जरिए दक्षिण भारत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
प्रतिनिधित्व में असमानता का उठाया मुद्दा
रेड्डी ने कहा कि अगर सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर और बढ़ जाएगा। इससे छोटे राज्यों के साथ अन्याय होने की आशंका है।
टैक्स और संसाधनों को लेकर भी सवाल
मुख्यमंत्री ने आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दक्षिण भारत के राज्य केंद्र को अधिक टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें कम हिस्सेदारी मिलती है। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी कमी लाने की कोशिश चिंता का विषय है।
हाइब्रिड मॉडल का दिया सुझाव
रेवंत रेड्डी ने सुझाव दिया कि डिलिमिटेशन के लिए एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाए, जिसमें 50% सीटें जनसंख्या के आधार पर और बाकी 50% राज्यों के आर्थिक योगदान (GSDP) के आधार पर तय हों।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर सभी राज्यों, राजनीतिक दलों और विधानसभाओं में विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।














