पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चली शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ गया है। इस बीच भारत में तैनात ईरानी राजदूत Mohammad Fathali ने बड़ा बयान देते हुए भारत का खुलकर धन्यवाद किया।
“भारत सबसे भरोसेमंद साथी”
ईरानी राजदूत ने कहा, ‘मैं सभी भारतीय लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मुश्किल समय में वे सचमुच भरोसेमंद साथी हैं. मैं भारत सरकार का भी धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने इस कठिन समय में सभी जरूरी इंतजाम करने में मदद की. हम अमेरिका की बुरी नीयत को न तो भूलें हैं और न ही कभी भूलेंगे. 12 दिनों के युद्ध के दौरान ईरान बातचीत प्रक्रिया में शामिल था, जबकि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर हम पर हमला शुरू किया था.’
अमेरिका की शर्तों पर अटका मामला
मोहम्मद फतहली ने बताया कि इस्लामाबाद वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने कई शर्तें रखीं। उन्होंने कहा, ‘वार्ता में ईरान ने जो घोषणा की उसमें परमाणु मुद्दा, युद्ध हर्जाना, प्रतिबंधों में राहत और कुछ अन्य शर्तें शामिल थी. जबकि अमेरिकी गैर कानूनी मांगें कर रहे हैं. हमारे उच्चस्तरीय अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों ने कहा कि हम शांति के लिए तैयार हैं. हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन ये भी पता होना चाहिए कि ईरान युद्ध के लिए भी तैयार है.’
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का दावा
ईरानी राजदूत ने कहा, ‘जंग से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ था. यूएस और इजरायल 12 दिनों तक हम पर हमला किया और उसके बाद उन्होंने युद्धविराम स्वीकार कर लिया. उन्होंने घोषणा की है कि हम बातचीत की मेज पर हैं और उसके बाद उन्होंने हम पर हमला किया. उन्होंने स्कूलों और अस्पतालों पर हमला किया. होर्मुज स्ट्रेट ईरान का क्षेत्र है.’
ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ी टकराव की आशंका
वार्ता फेल होने के बाद Donald Trump ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की धमकी दी, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
युद्ध और शांति के बीच खड़ा मध्य पूर्व
एक तरफ अमेरिका की सख्त रणनीति, दूसरी ओर ईरान की जवाबी चेतावनी—इन सबके बीच मध्य पूर्व का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में भारत के प्रति ईरान का यह सकारात्मक रुख कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।














