संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो चुका है, जिसमें केंद्र सरकार ने गुरुवार 16 अप्रैल को लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए। इन संशोधनों का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण बिल को लागू करना है। यह बिल पहले ही वर्ष 2023 में पारित हो चुका है।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन विधेयकों को सदन के पटल पर रखा, जिनमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में विस्तार से अपना पक्ष रखा।
“इस अवसर को जाने न दें, देश की दिशा तय होगी”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है, जिसे सभी सांसदों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस चर्चा से निकलने वाले निष्कर्ष देश की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करेंगे।
“21वीं सदी में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है”
पीएम मोदी ने कहा, “21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है. विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति महसूस कर रहे हैं. ये हमारे पास गौरव का पल है. विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास समाहित है.”
“50 फीसदी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी”
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “देश की 50 फीसदी जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, ये समय की मांग है. जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं उन्हें सलाह देना चाहता हूं कि हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब जब चुनाव आए, महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश की महिलाओं ने माफ नहीं किया. उनका हाल बुरे से बुरा किया है.”
“2024 में सहमति से पास हुआ, इसलिए विवाद नहीं हुआ”
प्रधानमंत्री ने कहा, “2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि 2024 में सबने इसे सहमति से पारित किया तो ये विषय ही नहीं रहा. किसी को फायदा किसी को नुकसान नहीं हुआ. जिनको राजनीति की बू आ रही है, उनका भी फायदा इसी में है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे.”
“महिलाएं अब वोकल हैं, निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी चाहती हैं”
पीएम मोदी ने कहा, “इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है. एक चर्चा सुनने को मिलती थी कि ये कैसे लोग हैं कि पंचायतों में आरक्षण देना है तो आराम से दे देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है. आज से पहले जिसने भी विरोध किया, वो राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया. पिछले 25-30 साल पहले महिलाएं बोलती नहीं थीं, आज वो वोकल हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “महिलाएं कहती हैं कि झाड़ू पोंछा वाले काम में तो जोड़ देते हो, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो. राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको ये मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 सालों में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं.”
“विरोध करने वालों को चुकानी पड़ेगी कीमत”
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “जो आज विरोध करेंगे, उसे लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी. महिलाओं को आने तो दो…”
अखिलेश और धर्मेंद्र यादव पर भी टिप्पणी
पीएम मोदी ने कहा, “अखिलेश जी मेरे मित्र हैं तो कभी कभी मदद कर देते हैं. मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं, लेकिन संविधान ने रास्ता दिखाया है कि सबको साथ लेकर चलूं. देश की नारी शक्ति हमारे निर्णय के साथ साथ हमारी नीयत को देखेगी.”
“2029 में लागू करने का अवसर, देरी नहीं करनी चाहिए”
उन्होंने बताया, “पिछले दिनों जब 2023 में हम चर्चा कर रहे थे, तब हर कोई कह रहा था कि जल्दी करो। 2024 में लागू करना संभव नहीं था. 2029 में अवसर है. समय की मांग है कि हम ज्यादा विलंब न करें.”
“क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं”
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है. इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नुकसान नहीं होगा. हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं. सबकी फोटो छपवा देंगे. ले लो जी क्रेडिट. सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं.”














