उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की कथित साजिश को प्रशासन ने तेजी से नाकाम कर दिया। शुरुआती जांच में यह मामला सामान्य श्रमिक असंतोष का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्लान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें कुछ राजनीतिक दलों और तथाकथित अर्बन नक्सल संगठनों की भूमिका सामने आई है।
बड़ी संख्या में गैर-श्रमिकों की गिरफ्तारी
उच्च स्तरीय सूत्रों के अनुसार, कुल 66 गिरफ्तार लोगों में से 45 ऐसे हैं जो वास्तविक श्रमिक नहीं थे। आगजनी से जुड़े 17 संदिग्धों में से 11 को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 8 गैर-श्रमिक बताए गए हैं।
इसके अलावा भड़काने के आरोप में 32 लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 19 को हिरासत में लिया गया है। वहीं 34 अन्य ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया, जो श्रमिक न होते हुए भी कथित आंदोलन में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
“सुनियोजित नेटवर्क के तहत रची गई साजिश”
सूत्रों का दावा है कि नोएडा के औद्योगिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए एक बड़े स्तर पर साजिश रची गई थी। इसमें कुछ राजनीतिक दलों का पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जिसका मकसद राज्य की प्रगति को प्रभावित करना और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करना बताया जा रहा है।
साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिनके संगठित नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है।
बाहरी राज्यों और सोशल मीडिया की भूमिका जांच में
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस घटनाक्रम में बाहरी राज्यों से आए कुछ लोगों की भी संलिप्तता सामने आई है। महिलाओं की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित तौर पर हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की मदद कर रही थीं।
इसके साथ ही कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिनके जरिए माहौल को भड़काने की कोशिश की गई।
सरकार का सख्त रुख, हालात हुए सामान्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। श्रमिकों के हित में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों के बीच सहमति बनी, जिससे औद्योगिक गतिविधियां तेजी से सामान्य हो गईं।
अब नोएडा की अधिकांश फैक्ट्रियों में कामकाज फिर से सुचारु रूप से शुरू हो गया है।
“जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत कार्रवाई जारी
राज्य सरकार ने साफ किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि सरकार औद्योगिक माहौल को बनाए रखने और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।














