महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर लोकसभा में चर्चा के दौरान गुरुवार (16 अप्रैल) को जमकर हंगामा देखने को मिला। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बीच मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर तीखी बहस हुई।
“धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं” – अमित शाह
बहस के दौरान अखिलेश यादव ने ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग प्रावधान की मांग उठाई। इसके जवाब में अमित शाह ने साफ कहा, “संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की बात नहीं है.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रस्ताव सरकार स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि यह संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
अखिलेश यादव का सवाल, “क्या मुस्लिम महिलाएं महिला नहीं?”
अखिलेश यादव ने इस पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि उनकी मांग असंवैधानिक कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को महिला नहीं माना जाएगा?
इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए तंज कसा, “हमें कोई आपत्ति नहीं है. यदि समाजवादी पार्टी चाहे तो सारे टिकट मुस्लिम महिलाओं को ही दे दे.”
2029 से लागू हो सकता है महिला आरक्षण
सरकार द्वारा पेश महिला आरक्षण संशोधन विधेयकों को मंजूरी मिलने के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
परिसीमन के बाद बढ़ सकती हैं सीटें
सरकार की ओर से पेश विधेयकों में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक की जा सकती है, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।
यह परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर किए जाने की बात कही गई है, जिससे विभिन्न राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।














