पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम ने एक अहम मोड़ पार करते हुए खुद को पूरी तरह विद्रोह मुक्त घोषित कर दिया है. इस ऐतिहासिक घोषणा की जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दी. उन्होंने बताया कि राज्य का आखिरी बचा हुआ जातीय विद्रोही समूह अब सरेंडर कर चुका है, जिसके साथ ही लंबे समय से जारी अस्थिरता का अंत हो गया है.
आखिरी विद्रोही समूह ने डाले हथियार
मुख्यमंत्री लालदुहोमा के मुताबिक, मिजोरम के आखिरी बचे जातीय विद्रोही ग्रुप ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. यह समूह लंबे समय से सक्रिय नहीं था, लेकिन समय-समय पर कुछ आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा था.
अधिकारियों के अनुसार, यह गुट लालमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाले हमार पीपल्स कन्वेंशन डेमोक्रेटिक (HPC-D) का हिस्सा था, जिसे राज्य का अंतिम विद्रोही संगठन माना जा रहा था.
43 सदस्यों का सरेंडर, ‘घर वापसी’ कार्यक्रम में हुआ ऐलान
आइजोल के पास सेसावंग में आयोजित ‘घर वापसी’ नामक कार्यक्रम के दौरान इस संगठन से जुड़े कुल 43 सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया. यह संगठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत हमार समुदाय के लिए स्वायत्त जिला परिषद की मांग कर रहा था.
मिजोरम सरकार और HPC-D के बीच 14 अप्रैल को एक शांति समझौता हुआ था, जिसे इस विद्रोह के अंत की निर्णायक कड़ी माना जा रहा है.
“हम अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं”, मुख्यमंत्री का बयान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अतीत में जब मिजोरम में शांति की बात होती थी, तो एचपीसी (D) विद्रोह की छाया मन में बनी रहती थी. हम एक समझौते पर पहुंचने के लिए खुले दिल से बातचीत के लिए आगे बढ़े. हमारे गृहमंत्री और उनके सहयोगियों काफी कोशिश की. हम अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं.”
उन्होंने राज्य में एकता पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी एक जनजाति मिजो पहचान से ऊपर नहीं है, और सभी को मिलकर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.














