उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं कि वाराणसी जिले में सहयोगी दल कांग्रेस को किन विधानसभा सीटों पर मौका दिया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, सपा नेतृत्व जमीनी समीकरणों और पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर सीटों का आकलन कर रहा है ताकि गठबंधन की रणनीति को मजबूत बनाया जा सके।
वाराणसी में चार सीटों पर कांग्रेस की नजर
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन और संगठन की सक्रियता को देखते हुए उसे जिले में बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस कैंट, उत्तरी, रोहनिया और पिंडरा विधानसभा सीटों पर विशेष रूप से फोकस कर रही है और इन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां भी बढ़ाई जा रही हैं।
अजय राय ने पहले ही दिए हैं संकेत
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन विस्तार का काम कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव में कांग्रेस कितनी सीटों पर लड़ेगी, इसका अंतिम फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
पार्टी के स्थानीय नेताओं का दावा है कि वाराणसी में कांग्रेस की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है। इसी वजह से पार्टी यहां अधिक सीटों की मांग कर सकती है।
पिंडरा सीट से चुनाव लड़ने के संकेत
कांग्रेस से जुड़े नेताओं के मुताबिक अजय राय पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में पिंडरा सीट से मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में पिंडरा विधानसभा सीट कांग्रेस की प्राथमिक सूची में शामिल मानी जा रही है।
इसके अलावा कैंट, उत्तरी और रोहनिया सीटों पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चुनावी तैयारियां शुरू होने की बात कही जा रही है।
इन सीटों पर सपा छोड़ना नहीं चाहती दावा
वाराणसी की कुछ विधानसभा सीटें ऐसी भी हैं जहां समाजवादी पार्टी खुद को कांग्रेस की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में मान रही है। पिछले चुनावों के वोट प्रतिशत और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर सपा इन सीटों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार दक्षिणी विधानसभा, शिवपुर, अजगरा और सेवापुरी सीटों पर समाजवादी पार्टी अपने चुनाव चिह्न पर ही उम्मीदवार उतारना चाहेगी। इन क्षेत्रों में पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक और स्थानीय नेटवर्क अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है।
गठबंधन की रणनीति पर टिकी निगाहें
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारा सबसे अहम मुद्दों में से एक माना जा रहा है। ऐसे में वाराणसी जैसी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों पर सपा और कांग्रेस के बीच किस तरह का समझौता होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर औपचारिक बातचीत और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज होने की संभावना है।















