अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा और दान से जुड़े कथित चोरी मामले में जांच तेज होने के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान सामने आया है। एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। उनके बयान ने इस पूरे मामले को नई राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
SIT रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट पर उठे सवाल
राम मंदिर दान और चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है। रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसी बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्रस्ट की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा, “श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठाए गए हैं और उनके खिलाफ चिंताएं जाहिर की गई हैं. श्री राम जन्मभूमि मंदिर हमारे लिए आस्था का केंद्र है और इस मामले ने करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. जब तक न्याय नहीं हो जाता, तब तक श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.”
‘न्याय होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, केवल न्याय होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह भी महसूस होना चाहिए कि न्याय निष्पक्ष तरीके से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और ऐसे पवित्र स्थल से जुड़े किसी भी विवाद को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
राम मंदिर को बताया करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं है, बल्कि पूरे हिंदू समाज की भावनाओं और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं आगे आकर पद छोड़ें ताकि जांच एजेंसियों पर किसी प्रकार का दबाव न रहे और जनता का भरोसा बना रहे।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिया गया प्रत्येक दान पवित्र होता है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना ट्रस्ट की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने मांग की कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही मंदिर प्रशासन और दान प्रबंधन व्यवस्था में जरूरी सुधार भी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद सामने न आएं।
राम भक्तों में बढ़ी नाराजगी
राम मंदिर दान मामले को लेकर कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है। विभिन्न संगठनों ने एसआईटी जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि सत्य सामने आना और न्याय मिलना सबसे महत्वपूर्ण है।
दान और चढ़ावा मामले की हो रही जांच
गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं एवं चोरी के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था।
हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि होने तक उसमें शामिल निष्कर्षों और संभावित आरोपियों को लेकर कोई अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।















