अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान नकदी, सोने के जेवर, मोबाइल फोन और एक कार बरामद की गई है। पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा ने कथित तौर पर चोरी के पैसों से अपनी पत्नी को सोने का लॉकेट गिफ्ट किया था, जिसे अब बरामद कर लिया गया है।
पुलिस रिमांड में तीनों आरोपियों से लगातार पूछताछ
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार तीन आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की, जहां से नकदी और अन्य सामान बरामद किया गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अनुकल्प मिश्रा के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद, सोने की चेन, एक मोबाइल फोन और उसके पिता के नाम पर खरीदी गई एक डिजायर कार बरामद हुई है। पुलिस ने कार को भी जब्त कर लिया है।
पत्नी को चोरी के पैसों से दिया था सोने का लॉकेट
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपी लवकुश मिश्रा ने कथित तौर पर चोरी के पैसों से अपनी पत्नी के लिए सोने का लॉकेट खरीदा था। पुलिस ने वह लॉकेट बरामद कर लिया है। इसके अलावा उसके पास से 38 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।
वहीं, तीसरे आरोपी करुणेश पांडेय के कब्जे से 15 हजार रुपये नकद मिलने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
सुनसान जगह पर होता था पैसों का बंटवारा
जांच के दौरान अयोध्या पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास स्थित एक सुनसान स्थान पर भी लेकर गई। पुलिस के अनुसार, यही वह जगह थी जहां आरोपी कथित तौर पर चोरी की रकम का आपस में बंटवारा किया करते थे।
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके अविनाश शुक्ला को भी पुलिस इस स्थान पर ले जाकर पूछताछ कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि आरोपी चोरी के बाद इसी स्थान पर इकट्ठा होकर रकम का बंटवारा करते थे।
श्रद्धालुओं से धन जुटाने के लिए इस्तेमाल की गईं फर्जी रसीदें
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए फर्जी रसीदों का भी इस्तेमाल किया था। जांच में मिली रसीदें देखने में असली रसीदों जैसी थीं और उन पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी छपा हुआ था, जिससे श्रद्धालुओं के लिए असली और नकली रसीद में अंतर करना आसान नहीं था।
पुलिस के मुताबिक, ट्रस्ट द्वारा ऑनलाइन रसीद प्रणाली शुरू किए जाने के बाद आरोपियों ने इन फर्जी रसीद पुस्तिकाओं का इस्तेमाल बंद कर दिया था। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।














