संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्य बनने की दिशा में भारत ने आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान की शुरुआत विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान की। कार्यक्रम में विभिन्न देशों के स्थायी प्रतिनिधि, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भारत ने अपने अभियान का विषय ‘शांति: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 2028-29 के लिए भारत-मानदंड, विश्वास और निष्ठा’ रखा है। भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति उसका दृष्टिकोण ‘शांति’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य मानदंडों, विश्वास और निष्ठा के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। इससे पहले भारत वर्ष 2021-22 के दौरान भी सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है।
ताजिकिस्तान से होगा मुकाबला
UNSC की 2028-29 अवधि के लिए चुनाव अगले वर्ष जून में आयोजित होंगे। एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र उपलब्ध सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।
इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इससे पहले वह 5 से 10 जुलाई के बीच कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के दौरे पर थे। इसके बाद वह न्यूयॉर्क पहुंचे और 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में भाग लेने के साथ यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे।
बदलते वैश्विक हालात के बीच होगा चुनाव
यह चुनाव ऐसे समय में होने जा रहा है, जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दों ने वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत जैसे विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी और अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
UNSC सुधार की लगातार मांग करता रहा है भारत
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थक रहा है। भारत का तर्क है कि वर्ष 1945 में गठित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई है। इसलिए परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों में सदस्य संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। भारत लगातार यह भी दोहराता रहा है कि वह सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का मजबूत और वैध दावेदार है।















