इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर को उत्तर प्रदेश में होटल और रेस्तरां में हुक्का पीने को लेकर अहम आदेश सुनाया। कोर्ट ने होटल और रेस्तरां में हुक्का परोसने पर रोक लगाते हुए हुक्का बार चलाने को भी अवैध करार दिया। अदालत ने लोगों, खासकर युवाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हुक्का सेवा पर सख्ती की बात कही है।
कोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में होटल और रेस्तरां संचालकों के लिए हुक्का सर्विस को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का सेवा को लेकर लागू कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करते हुए इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना।
हुक्का बार चलाना बताया अवैध
हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर डेजिग्नेटेड स्मोकिंग एरिया के भीतर भी हुक्का सेवा नहीं दी जा सकती। अदालत के मुताबिक, ऐसा करना 2017 में संशोधित नियमों और COTPA के प्रावधानों का उल्लंघन है।
अदालत ने इस बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया कि पहले नियमों में ‘नो अदर सर्विस’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन 2017 में इसे बदलकर ‘नो सर्विस’ कर दिया गया। कोर्ट के अनुसार, नियमों में किए गए इस बदलाव का हुक्का सेवा पर भी प्रभाव पड़ता है।
Smoking Area का मतलब हुक्का परोसने की अनुमति नहीं
कोर्ट ने कहा कि नियमों में हुए बदलाव के बाद हुक्का सेवा को लेकर मौजूद कानूनी अस्पष्टता खत्म हो गई है। 30 या उससे अधिक सीट वाले रेस्टोरेंट में कानून कुछ शर्तों के तहत अलग स्मोकिंग एरिया की अनुमति देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस स्थान पर व्यावसायिक रूप से हुक्का परोसा जा सकता है।
इस तरह अदालत ने डेजिग्नेटेड स्मोकिंग एरिया और व्यावसायिक हुक्का सर्विस के बीच अंतर स्पष्ट किया है। यानी स्मोकिंग एरिया की अनुमति को हुक्का बार चलाने की अनुमति के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
साफ हवा में सांस लेना मौलिक अधिकार
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर साफ हवा के अधिकार को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सार्वजनिक स्थान पर साफ हवा में सांस लेना गैर-धूम्रपान करने वालों का मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने इस अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कारोबार करने के अधिकार से ऊपर माना। अदालत की टिप्पणी का सीधा असर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से जुड़े व्यावसायिक इस्तेमाल पर पड़ता है।
हुक्का स्वास्थ्य के लिए कम नुकसानदेह होने की धारणा पर टिप्पणी
अदालत ने हुक्का से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदेह होने की धारणा सही नहीं है। आदेश में कहा गया कि 200 कश लिए जाते हैं और इसका नुकसान 100 सिगरेट पीने के बराबर बताया गया है।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से हुक्का सेवा के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दंड के लिए कदम उठाने की अपेक्षा भी जताई है। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में होटल, रेस्तरां और हुक्का बार में हुक्का सेवा को लेकर नियमों के पालन पर निगरानी और कार्रवाई का मुद्दा अहम हो गया है।














