अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। मध्य पूर्व (Middle East) में भड़के इस युद्ध की तपिश और दर्द हजारों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भी साफ महसूस किया जा रहा है। खामेनेई की मौत की खबर आते ही बाराबंकी के ‘किंतूर’ (Kintoor) गांव में सन्नाटा छा गया और लोग भारी गम में डूब गए।
बाराबंकी के किंतूर गांव से जुड़ी हैं पुश्तैनी जड़ें
ईरान के सबसे ताकतवर नेता का यूपी के एक छोटे से गांव से बेहद गहरा नाता रहा है:
- दादा का था पुश्तैनी मकान: बाराबंकी की सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित किंतूर गांव खामेनेई का पुश्तैनी गांव माना जाता है। 18वीं-19वीं सदी के दौरान उनके दादा ‘सैयद अहमद मुसावी हिंदी’ (Syed Ahmad Musavi Hindi) इसी गांव में रहा करते थे।
- पहचान के लिए नाम में जोड़ा ‘हिंदी’: अपनी मातृभूमि और गांव की मिट्टी से जुड़ाव बनाए रखने के लिए ही उनके परिवार ने ईरान जाकर भी अपने नाम के साथ हमेशा ‘हिंदी’ (Hindi) उपनाम जोड़े रखा।
- आज भी मौजूद हैं निशान: गांव के बुजुर्गों का कहना है कि आज भी इस गांव में उनके पुश्तैनी मकान की यादें और कुछ पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं, जो ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ इस गांव के गहरे रिश्ते की गवाही देते हैं।
‘यह पूरी दुनिया का नुकसान है…’ नम हुईं गांव वालों की आंखें
रविवार (1 मार्च 2026) को जैसे ही टीवी और सोशल मीडिया के जरिए इस जानलेवा हमले की खबर गांव पहुंची, लोग अपने घरों में बैठकर खबरें देखने लगे।
- स्थानीय निवासी सैय्यद निहाल मियां और डॉ. रेहान काजमी ने नम आंखों से अपना दुख जताते हुए इसे “इतिहास का दर्दनाक पल” और पूरी दुनिया की एक अपूरणीय क्षति बताया।
- गांव के लोग आपस में बैठकर इस ऐतिहासिक जुड़ाव और पुरानी यादों की भावुक चर्चा कर रहे हैं।
छोटे से गांव की बड़ी वैश्विक पहचान
भले ही किंतूर गांव के लोग एक बहुत ही साधारण जीवन जीते हों, लेकिन इस दुखद घटना ने इस गांव को अचानक अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। गांव वालों को अपने इस ऐतिहासिक संबंध पर गर्व है, लेकिन इस जानलेवा हमले की खबर ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है।














