समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की कानूनी चुनौतियां एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। रामपुर जेल में बंद आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को आयकर विभाग ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस में ट्रस्ट को मिली आयकर छूट समाप्त किए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामला सरकारी धन और जमीन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है।
जौहर ट्रस्ट को मिली टैक्स छूट पर उठे सवाल
आयकर विभाग ने चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत जौहर ट्रस्ट को दी गई कर छूट की समीक्षा शुरू कर दी है। आरोप है कि ट्रस्ट के नाम पर सरकारी संसाधनों का उपयोग किया गया और चैरिटी के उद्देश्य से गठित संस्था को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया। शिकायतों के आधार पर विभाग ने ट्रस्ट से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
सरकारी जमीन और धन के दुरुपयोग के आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आजम खान ने मंत्री रहते हुए अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर सरकारी जमीन और सरकारी धन को जौहर यूनिवर्सिटी के विकास में लगाया। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि ट्रस्ट का संचालन सार्वजनिक हित के बजाय परिवार केंद्रित तरीके से किया गया।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने लगाए गंभीर आरोप
मामले की शिकायत करने वाले भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने कहा, ” शिकायतें तो बहुत हैं, जो पहले से की जा चुकी थीं, उन्हीं शिकायतों को लेकर कई बार इनकम टैक्स की तरफ से नोटिस भी जारी हुए, लेकिन इन लोगों ने कभी किसी नोटिस का संज्ञान नहीं लिया. कभी किसी नोटिस का जवाब नहीं दिया गया. आज के समय में जो सबसे बड़ा घोटाला है, वो जौहर यूनिवर्सिटी का ट्रस्ट है.”
उन्होंने ट्रस्ट की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा, ”आजम खान के ट्रस्ट में एक व्यक्ति को छोड़ दें तो सारे सदस्य उनके परिवार के हैं. जैसे उनके दोनों बेटे हैं, उनकी पत्नी हैं, उनकी बहन हैं और इस तरीके के लोग हैं, जो पूरे तरीके से आजम खान के साथ हैं. यह ट्रस्ट नहीं है. यह एक तरीके से परिवार है, आपने हर चीज पूरी प्लानिंग के साथ बनाई है. सरकारी पैसे का उपयोग आपने यह दिखाकर किया कि आप इस ट्रस्ट में सोशल वर्क की तरह काम करना चाहते हो, लेकिन जांच में सामने आया कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए किया गया.”
यूनिवर्सिटी की जमीन और निर्माण को लेकर भी विवाद
आकाश सक्सेना ने दावा किया कि जौहर यूनिवर्सिटी का बड़ा हिस्सा सरकारी भूमि पर बना है। उनके अनुसार, ”इस यूनिवर्सिटी में किसी तरीके का आज तक कोई सोशल वर्क या जो सरकार के नियम होते हैं, उनके आधार पर नहीं किया गया. जौहर यूनिवर्सिटी 560 एकड़ में है और 350 एकड़ से ज्यादा भूमि इसमें सरकारी है, जिसे हम कोर्ट में साबित कर चुके हैं. पिछले साल इनकम टैक्स ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि यह यूनिवर्सिटी की सारी बिल्डिंग सरकारी पैसे से बनी है.”
नोटिस का जवाब देने की मांग
भाजपा विधायक ने कहा कि यदि आयकर विभाग ने नोटिस जारी किया है तो संबंधित पक्ष को उसका जवाब देना चाहिए। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर छापेमारी भी की थी। अब विभाग द्वारा जारी ताजा नोटिस के बाद मामले ने फिर से राजनीतिक और कानूनी महत्व हासिल कर लिया है, जिससे आजम खान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।















