भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का लंबे समय से विरोध करने वाला बांग्लादेश अब खुद म्यांमार से लगने वाली अपनी सीमा पर फेंसिंग करने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने घोषणा की है कि वह म्यांमार से सटी 271 किलोमीटर लंबी सीमा में से 108 किलोमीटर हिस्से पर कंटीले तारों की बाड़ लगाएगी।
सरकार ने इस फैसले के पीछे अवैध घुसपैठ, सीमा पार अपराध और तस्करी जैसी गतिविधियों को मुख्य कारण बताया है। इसके अलावा म्यांमार सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भी यह कदम उठाया जा रहा है।
रखाइन प्रांत की स्थिति बनी चिंता का कारण
बताया जा रहा है कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में बढ़ती अस्थिरता भी बांग्लादेश सरकार की चिंता का बड़ा कारण है। वर्तमान में इस क्षेत्र में अराकान आर्मी का प्रभाव बढ़ा हुआ है और रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे को लेकर बांग्लादेश और अराकान आर्मी के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सरकार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फेंसिंग को जरूरी मान रही है।
आजादी के बाद पहली बार किसी सीमा पर लगेगी बाड़
जापानी अखबार निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद बांग्लादेश ने अब तक किसी भी पड़ोसी देश के साथ अपनी सीमा पर फेंसिंग नहीं की है। इतना ही नहीं, वह भारत द्वारा अपनी सीमा पर लगाए जा रहे कंटीले तारों का लगातार विरोध करता रहा है।
हालांकि अब पहली बार बांग्लादेश म्यांमार से लगने वाली 108 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने की तैयारी कर रहा है। इसे देश की सीमा सुरक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
फैसले पर उठ रहे दोहरे रवैये के सवाल
बांग्लादेश सरकार के इस फैसले के बाद उसकी नीति को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। एक ओर बांग्लादेश अपनी सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए म्यांमार सीमा पर फेंसिंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत द्वारा अपनी सीमाओं की सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के उद्देश्य से की जाने वाली फेंसिंग का वह लगातार विरोध करता रहा है।















