सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे सवालों के बीच 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार (2 जून 2026) को संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने उन्हें प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) देने के लिए आमंत्रित किया था।
बैठक के दौरान समिति ने सीबीएसई की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में उपयोग किए जा रहे OSM सिस्टम तथा छात्रों द्वारा उठाई गई शिकायतों और चिंताओं की समीक्षा की।
प्रेजेंटेशन के बाद क्या बोले समिति अध्यक्ष?
प्रेजेंटेशन समाप्त होने के बाद समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब समिति सीबीएसई की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी।
उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, “उन्होंने (OSM सिस्टम से प्रभावित छात्रों में से एक सार्थक सिद्धांत) अपना प्रेजेंटेशन दे दिया है. अब सीबीएसई की तरफ से दिए गए जवाबों पर फैसला लेना कमेटी का काम है.”
समिति अब छात्र द्वारा उठाए गए मुद्दों और सीबीएसई के स्पष्टीकरण का अध्ययन करने के बाद आगे का निर्णय लेगी।
ब्लॉग पोस्ट से चर्चा में आए थे सार्थक सिद्धांत
सार्थक सिद्धांत उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल पर उपलब्ध टेंडर दस्तावेजों का अध्ययन किया और अपनी जांच से जुड़े निष्कर्ष एक ब्लॉग पोस्ट में प्रकाशित किए।
अपने लेख में उन्होंने आरोप लगाया था कि सीबीएसई ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े टेंडर नियमों में ऐसे बदलाव किए, जिनसे एक विशेष कंपनी को लाभ मिला।
सार्थक के अनुसार विभिन्न टेंडर चरणों में पात्रता और तकनीकी आवश्यकताओं में संशोधन किए गए, जिससे कोएम्प्ट एडुटेक (Coempt EduTeck) को फायदा पहुंचा।
किन कथित विसंगतियों का किया जिक्र?
एएनआई से बातचीत में सार्थक सिद्धांत ने दावा किया कि उनके ब्लॉग में कम से कम 15 कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ प्रमुख बिंदुओं को उन्होंने संसदीय समिति के सामने भी रखा।
सार्थक ने कहा, “मेरे ब्लॉग के मुताबिक कम से कम 15 विसंगतियां थीं. मैं उनमें से तीन या चार को उजागर करना चाहूंगा. पहले मैं कोएम्प्ट के बारे में बैकग्राउंड बताना चाहता हूं. इसे पहले ग्लोबरीना (Globarena) के नाम से जाना जाता था और इसका रिकॉर्ड काफी संदिग्ध रहा है. कोएम्प्ट की वजह से 23 छात्रों ने सुसाइड किया था.”
उन्होंने आगे दावा किया कि नई निविदा (RFP) में खराब प्रदर्शन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण शर्तों को हटा दिया गया।
टेंडर शर्तों में बदलाव पर उठाए सवाल
सार्थक के अनुसार पहले की निविदा शर्तों में ऐसी कंपनियों को लेकर सख्त प्रावधान थे जिन्हें कभी ब्लैकलिस्ट किया गया हो। हालांकि नई RFP में इस शर्त को बदलकर केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्ट कंपनियों तक सीमित कर दिया गया।
उन्होंने कहा, “पहली बड़ी विसंगति खराब प्रदर्शन (Poor Performance) से संबंधित तीन शर्तों को नई RFP (Request for Proposal) से पूरी तरह हटा दिया गया. पहले की RFP में पहले कभी ब्लैकलिस्ट किया गया हो जैसी शर्त थी, जबकि नई RFP में इसे बदलकर वर्तमान में ब्लैकलिस्ट हो कर दिया गया. बोर्ड ऐसा सर्विस प्रोवाइडर क्यों चाहेगा, जिसे पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका हो?”
अब सीबीएसई के जवाब पर टिकी निगाहें
संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए इन आरोपों और सवालों के बाद अब सबकी नजर सीबीएसई की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है। समिति छात्र द्वारा उठाए गए मुद्दों, उपलब्ध दस्तावेजों और बोर्ड के स्पष्टीकरण की समीक्षा करने के बाद आगे की कार्रवाई या सिफारिशों पर विचार कर सकती है।














