अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने की अपनी पुरानी ख्वाहिश को हवा दे दी है। 14 जनवरी, 2026 को अमेरिकी, डेनिश और ग्रीनलैंडिक अधिकारियों के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से ग्रीनलैंड बेहद अहम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे का कोई न कोई समाधान निकल आएगा। हालांकि, ट्रंप की इस महत्वकांसा को खुद उनके ही देश के नागरिकों का समर्थन नहीं मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी जनता इस विचार से इत्तेफाक नहीं रखती, जबकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने दो-टूक कह दिया है कि उनका क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।
सर्वे में 69% लोगों ने सैन्य कार्रवाई को नकारा
ट्रंप की इस जिद के बीच रॉयटर्स और इप्सोस ने शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को एक सर्वे किया, जिसके नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। सर्वे के अनुसार, पांच में से एक से भी कम अमेरिकी नागरिक ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की कोशिशों का समर्थन करते हैं।
- कब्जे का समर्थन: जब लोगों से पूछा गया कि क्या वे ग्रीनलैंड पर कब्जे का समर्थन करते हैं, तो 47 प्रतिशत अमेरिकियों ने साफ ‘नहीं’ में जवाब दिया। मात्र 17 प्रतिशत लोग इसके पक्ष में दिखे, जबकि 36 प्रतिशत ने ‘पता नहीं’ कहा।
- सैन्य बल का प्रयोग: सबसे अहम सवाल यह था कि क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड और पनामा कैनल को अपनी टेरिटरी बनाने के लिए सेना का इस्तेमाल करना चाहिए? इस पर सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों ने हामी भरी, जबकि 69 प्रतिशत लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया।
पश्चिमी गोलार्ध में प्रभुत्व पर बंटी राय
यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया है। सर्वे में जब पूछा गया कि क्या अमेरिका को पश्चिमी गोलार्ध के मामलों में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए सख्त नीति अपनानी चाहिए, तो 33 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 41 प्रतिशत ने विरोध किया। 26 प्रतिशत लोगों ने इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए नाटो सक्रिय
ट्रंप की लगातार बयानबाजी और जिद के कारण ग्रीनलैंड के स्थानीय निवासियों में चिंता का माहौल है। वहां के नेताओं ने डेनमार्क के साथ अपनी एकजुटता दोहराई है। इस बीच, डेनमार्क ने द्वीप की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नाटो (NATO) की बड़ी और स्थायी मौजूदगी की योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में गुरुवार (15 जनवरी, 2026) को यूरोपीय देशों ने एहतियातन ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती भी कर दी है।













